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चार धाम यात्रा में दुर्घटना होने पर यात्रियों को कैसे मिलेगा 10 करोड़ बीमा का लाभ? जानिये

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देहरादून, 16 मई। चारधाम यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए मानव उत्थान सेवा समिति ने इस वर्ष भी 10 करोड़ रुपये का सामूहिक दुर्घटना बीमा कराया है. खासकर केदारनाथ जैसे ऊंचाई वाले धामों में स्वास्थ्य जोखिम बढ़ने के बीच यह पहल यात्रियों के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है.

चारधाम यात्रा में सुरक्षा का भरोसा: उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा हर साल देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करती है. हिमालय की गोद में बसे बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम न केवल आस्था के केंद्र हैं, बल्कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और ऊंचाई वाले क्षेत्रों के कारण चुनौतीपूर्ण यात्रा भी माने जाते हैं. ऐसे में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और आपदा की स्थिति में राहत के उद्देश्य से मानव उत्थान सेवा समिति ने इस वर्ष भी चारधाम यात्रियों के लिए 10 करोड़ रुपये का सामूहिक दुर्घटना बीमा कराया है. इसके लिए 3 लाख 67 हजार 995 रुपये की प्रीमियम राशि का चेक पर्यटन, धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सौंपा.

10 करोड़ के बीमा का गणित क्या है
सतपाल महाराज ने कहा कि चारधाम यात्रा उत्तराखंड की पहचान और धार्मिक पर्यटन का सबसे बड़ा केंद्र है. यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए मानव उत्थान सेवा समिति लगातार कई वर्षों से बीमा सुविधा उपलब्ध कराती रही है. इस बार भी यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के माध्यम से श्री बदरीनाथ-श्री केदारनाथ मंदिर समिति के जरिए 10 करोड़ रुपये का बीमा कराया गया है. इस बीमा पालिसी में चारों धामों के लिए 2.50-2.50 करोड़ रुपये का बीमा कवर निर्धारित किया गया है.

यात्रियों को इससे क्या लाभ मिलेगा?
यदि यात्रा के दौरान चारों धामों के मंदिर परिसरों में कोई अनहोनी होती है तो प्रभावित श्रद्धालुओं या उनके आश्रितों को आर्थित मदद दी जायेगी। मंदिर परिसरों में भगदड़, प्राकृतिक आपदा, ईश्वरीय जोखिम और आतंकवाद जैसी घटनाओं से प्रभावित प्रत्येक श्रद्धालु को एक लाख रुपये की सहायता राशि (यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस) के माध्यम से मिलेगी. यह व्यवस्था यात्रा के दौरान किसी भी अप्रत्याशित घटना की स्थिति में पीड़ित परिवारों को तत्काल राहत देने के उद्देश्य से की गई है. पिछले वर्षों में भी यह योजना लागू रही है और इसे यात्रियों की सुरक्षा की दिशा में एक अहम पहल माना गया है.

हर साल यात्रा के दौरान होती ही सैकड़ों श्रद्धालुओं की मौत
दरअसल, चारधाम यात्रा विशेषकर केदारनाथ धाम की यात्रा शारीरिक दृष्टि से कठिन मानी जाती है. समुद्र तल से करीब 11,755 फीट की ऊंचाई पर स्थित केदारनाथ तक पहुंचने के लिए लंबा पैदल मार्ग, कम ऑक्सीजन, अचानक बदलता मौसम और ठंडे वातावरण का सामना करना पड़ता है. हर साल यात्रा सीजन में कई श्रद्धालु स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करते हैं. इनमें सांस लेने में दिक्कत, उच्च रक्तचाप, हार्ट अटैक, ऑक्सीजन की कमी और थकावट प्रमुख हैं. कई मामलों में बुजुर्ग यात्रियों और पहले से बीमार लोगों के लिए स्थिति गंभीर भी हो जाती है.

सबसे कठिन है केदारनाथ धाम की यात्रा
केदारनाथ यात्रा में स्वास्थ्य सुरक्षा और बीमा दोनों का महत्व बढ़ जाता है. विशेषज्ञों का मानना है कि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में यात्रा करने वाले लोगों को पहले से स्वास्थ्य परीक्षण कराना चाहिए. जिन लोगों को हृदय रोग, अस्थमा, हाई ब्लड प्रेशर या अन्य गंभीर बीमारी है, उन्हें डॉक्टर की सलाह के बिना केदारनाथ की यात्रा नहीं करनी चाहिए. सरकार भी लगातार यात्रियों को स्वास्थ्य जांच, रजिस्ट्रेशन और मेडिकल प्रमाणपत्र के प्रति जागरूक कर रही है.

पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज की तीर्थयात्रियों से अपील
सतपाल महाराज ने भी श्रद्धालुओं से अपील की कि यात्रा पर आने से पहले स्वास्थ्य परीक्षण अवश्य कराएं. उन्होंने कहा कि यात्रा मार्ग पर चिकित्सा सुविधाएं बढ़ाई गई हैं, लेकिन यात्रियों को अपनी व्यक्तिगत सावधानियां भी बरतनी चाहिए. जरूरी दवाएं, प्राथमिक चिकित्सा सामग्री और आवश्यक दस्तावेज साथ रखें. उन्होंने कहा कि कई बार मौसम अचानक बदलने से यात्रा प्रभावित होती है, ऐसे में प्रशासन के निर्देशों का पालन करना बेहद जरूरी है.

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