बिथ्याणी डिग्री कॉलेज और AMU के संयुक्त तत्वावधान में ‘मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम’ का आयोजन

बिथ्याणी (यमकेश्वर), 19 मई। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में संकाय सदस्यों की व्यावसायिक दक्षता, अकादमिक नेतृत्व और शिक्षण कौशल को समकालीन वैश्विक मानकों के अनुरूप सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आज एक ऐतिहासिक अध्याय लिखा गया। महायोगी गुरु गोरखनाथ राजकीय महाविद्यालय (एमजीजीडीसी), बिथ्याणी, यमकेश्वर (श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय) तथा देश के प्रतिष्ठित एवं अग्रणी केंद्रीय संस्थान अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के संयुक्त तत्वावधान में ‘मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम’ (UGC-MMTTC) के अन्तर्गत NEP 2020 Orientation and Sensitization Programme का अत्यंत भव्य, गरिमापूर्ण और वैचारिक रूप से समृद्ध आयोजन किया गया।
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्र में उच्च शिक्षा को मजबूत करने की अनूठी पहल
इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का मूल उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के आलोक में शिक्षकों के भीतर एक नई चेतना, नवाचारी पद्धतियों और नेतृत्व क्षमता का विकास करना था, ताकि सुदूरवर्ती क्षेत्रों में भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का प्रसार सुनिश्चित किया जा सके।
कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ एवं अतिथियों का स्वागत
इस उच्च स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत कार्यक्रम समन्वयक डॉ. उमेश त्यागी के ऊर्जावान वक्तव्य के साथ हुई। डॉ. त्यागी ने मंच संचालन करते हुए वर्तमान शैक्षिक परिदृश्य में निरंतर शिक्षक प्रशिक्षण (Continuous Professional Development) की अपरिहार्य आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, एक सशक्त राष्ट्र के निर्माण की नींव केवल और केवल अपडेटेड और प्रेरित शिक्षक ही रख सकते हैं।
इसके पश्चात, महाविद्यालय के माननीय प्राचार्य ने अकादमिक जगत के दिग्गज वक्ताओं, नीति-निर्माताओं और विभिन्न प्रांतों से जुड़े शोधार्थियों एवं प्राध्यापकों का आत्मीय स्वागत किया। प्राचार्य ने अपने स्वागत भाषण में गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय जैसे अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संस्थान के साथ यह सहयोग (Collaboration) उत्तराखंड के इस पर्वतीय अंचल के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा।
अध्यक्षीय उद्बोधन: मालवीय मिशन की दृष्टि
इस राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की अध्यक्षता यूजीसी मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम (MMTTC) की निदेशक डॉ. फैजा अब्बासी द्वारा की गई। अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. फैजा अब्बासी ने मालवीय मिशन के मूल सिद्धांतों और इसके दूरगामी उद्देश्यों पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि: इस मिशन का ध्येय केवल पारंपरिक शिक्षण पद्धतियों को दोहराना नहीं है, बल्कि शिक्षकों के भीतर एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तार्किक क्षमता और अनुसंधान-उन्मुख चेतना का संचार करना है। उन्होंने एमजीजीडीसी बिथ्याणी और एएमयू के इस अनूठे समन्वय की सराहना करते हुए कहा कि ज्ञान का आदान-प्रदान भौगोलिक सीमाओं से परे होना चाहिए, तभी वास्तविक शैक्षिक समावेशन संभव है।
प्रथम तकनीकी सत्र: आधुनिक शिक्षा शास्त्र और व्यावहारिक चुनौतियां
उद्घाटन सत्र के ठीक बाद प्रथम तकनीकी सत्र का प्रारंभ हुआ, जो पूरी तरह से शिक्षा शास्त्र (Pedagogy) और आधुनिक शिक्षण तकनीकों के व्यावहारिक अनुप्रयोग पर केंद्रित था। इस सत्र के मुख्य वक्ता अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के शिक्षा शास्त्र विभाग के प्रतिष्ठित विभागाध्यक्ष प्रो. साजिद जमाल रहे।
प्रो. साजिद जमाल ने प्राध्यापकों को संबोधित करते हुए एक बेहद महत्वपूर्ण बात कही कि—एक आदर्श शिक्षक को स्वयं सदैव एक सक्रिय विद्यार्थी के रूप में जीवित रहना चाहिए। उन्होंने नवीन शिक्षण सहायक सामग्रियों (ICT tools), डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और छात्र-केंद्रित (Learner-centric) दृष्टिकोण को अपनाने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया।
प्रथम सत्र के समापन पर डॉ. अनुपम त्यागी द्वारा अत्यंत गरिमापूर्ण और संक्षिप्त रूप में धन्यवाद ज्ञापन (Vote of Thanks) प्रस्तुत किया गया और प्रो. साजिद जमाल के बहुमूल्य मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया गया।
द्वितीय तकनीकी सत्र: अकादमिक नेतृत्व और संस्थागत उत्कृष्टता
मध्यांतर के पश्चात शुरू हुए द्वितीय तकनीकी सत्र का मुख्य विषय ‘अकादमिक नेतृत्व’ (Academic Leadership) था। इस सत्र को संबोधित करने के लिए यूजीसी एचआरडीसी (UGC HRDC), अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय अकादमिक लीडरशिप के निदेशक प्रो. ए. आर. किदवई मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।
प्रो. ए. आर. किदवई ने अपने व्याख्यान में स्पष्ट किया कि एक शिक्षक केवल कक्षा के भीतर ही नहीं, बल्कि संपूर्ण संस्थान के विकास में अपनी प्रशासनिक और नैतिक नेतृत्व क्षमता के माध्यम से क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकता है। उन्होंने शिक्षकों को प्रेरित करते हुए कहा कि संस्थागत उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए नवाचार और टीम-वर्क सबसे महत्वपूर्ण उपकरण हैं।
धन्यवाद ज्ञापन: इस सत्र के अंत में डॉ. पी.जी. कॉलेज मुरादाबाद की डॉ. सुनीति लता द्वारा आदर के साथ धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया और मुरादाबाद एवं अन्य संकायों की ओर से सभी का आभार जताया गया।
दूरगामी परिणाम और निष्कर्ष
यह एक दिवसीय राष्ट्रीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम उत्तराखंड के यमकेश्वर क्षेत्र के अकादमिक इतिहास में एक विशिष्ट और सुनहरे अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है। कार्यक्रम के समापन पर देश के विभिन्न हिस्सों से ऑनलाइन और ऑफलाइन जुड़े प्रतिभागियों ने अपने फीडबैक में कहा कि दोनों सत्रों के माध्यम से उन्हें न केवल सैद्धांतिक समझ मिली, बल्कि व्यावहारिक कौशल भी प्राप्त हुआ।
अंत में, संयोजक मंडल ने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए दोनों विश्वविद्यालयों के तकनीकी स्टाफ, आयोजन समिति के समर्पित सदस्यों तथा सभी सहयोगियों के प्रति हृदय से कृतज्ञता व्यक्त की। यह आयोजन राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका को सुदृढ़ करने की दिशा में एक ऐतिहासिक प्रयास रहा।



