UGC NET के पेपर में गड़बड़ी के बाद NTA ने पेपर सेट करने वाली टीम बदली, 600 प्रोफेसरों को हटाया

नई दिल्ली, 19 अगस्त, 26. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की परीक्षाओं में लगातार गड़बड़ी और प्रश्नपत्र में गलतियां सामने आने के बाद सिस्टम में बड़े बदलाव शुरू हो गए हैं। सूत्रों का कहना है कि एनटीए की विभिन्न परीक्षाओं में पेपर सेट करने वाली पुरानी टीम को बदल दिया गया है और नई टीम बनाई गई है। करीब 600 ऐसे प्रफेसर, टीचर्स, विशेषज्ञों को बदला गया है, जो लंबे समय से परीक्षाओं का प्रश्नपत्र तैयार कर रहे थे। पेपर सेटिंग की प्रक्रिया के लिए नई टीम बनाई गई है।
चार स्तर पर होगी जांच की व्यवस्था
पेपर सेट होने के बाद कम से कम 4 स्तर पर उसकी जांच की व्यवस्था भी की जा रही है। जून में यूजीसी नेट की परीक्षा होने के बाद नई टीम को बाकी परीक्षाओं का प्रश्नपत्र तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई और सूत्र बताते हैं कि पेपर सेटिंग की नई टीम ने हाल ही में हुई पिछली दो परीक्षाओं के प्रश्नपत्र तैयार भी किए है। एनटीए के आंतरिक ढांचे की समीक्षा के बाद बड़े बदलावों की पूरी लिस्ट तैयार की गई है।
UGC NET री-टेस्ट में डेढ़ लाख उम्मीदवार
यूजीसी नेट जून परीक्षा में इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलोजी का पेपर देने वाले करीब डेढ़ लाख उम्मीदवार थे और इन तीनों विषयों का 9-10 सितंबर को रीटेस्ट होगा। रीटेस्ट का फैसला सामने आने के बाद उम्मीदवारों ने सवाल उठाते हुए कहा कि दोबारा परीक्षा देना आसान नहीं होता। पेपर के लिए खुद को तैयार करना तो एक मुद्दा है ही, साथ ही एग्जाम सेंटर कहां होंगे? वहीं एनटीए सूत्र कह रहे हैं कि उम्मीदवारो ने अपने आवेदन फॉर्म में जिस शहर को प्राथमिकता में लिखा है, उसी शहर में परीक्षा केंद्र होगा।
एनटीए ने री-एग्जाम के लिए अडिशनल फीस नहीं लेने की बात कही है लेकिन उम्मीदवारों का कहना है कि केवल अडिशनल फीस नहीं लिए जाने से समस्या खत्म नहीं हो जाएगी। कुछ उम्मीदवारों ने कहा कि क्या पेपर सेट करने वाले कापी पेस्ट कर देते हैं। जैसे कि इंग्लिश के पेपर में हुआ था, जिसमें करीब 67 सवाल 2024 में आए हुए थे। 2024 की तरह 2026 में भी मेडिकल, यूजीसी नेट की परीक्षाओं में गड़बड़ी सामने आई है।
NTA की कमिटी ने की जांच, प्रश्नपत्र में बेसिक भी ठीक नहीं था
3 विषयों के प्रश्नपत्र में गलतियों के बाद एनटीए ने एक कमिटी बनाई, जिसने प्रश्नपत्रों की जांच की। सोशियोलॉजी के पेपर में तो स्पेलिंग और व्याकरण की ऐसी- ऐसी गलतियां थी, जो होनी ही नहीं चाहिए थी।
पेपर सेटर और अनुवाद करने वाले ने बेसिक्स को भी फॉलो नहीं किया
कुछ उम्मीदवार ने यह भी आरोप लगाया कि पेपर के कुछ हिस्से AI-जनरेटेड लग रहे थे।
प्रश्नपत्र में जाने-माने विचारकों के नाम गलत लिखे थे, हिंदी अनुवाद खराब था और कुछ सवाल तय सिलेबस से संबंधित नहीं थे।
उम्मीदवारों ने बताया था कि ‘Ritzer’ को ‘Putzer’, ‘Parsons’ को ‘Parsow’, ‘Ghurye’ को ‘Ghunye’ और A R Desai को ‘A K Desai’ लिखा गया था।
कमिटी ने भी माना है कि इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी के UGC-NET पेपर में कई गलतियां थीं और सवाल दोहराए गए थे। ये कमियां इतनी ज्यादा थीं कि इन्हें सिर्फ आंसर-की पर मिली आपत्तियों के बाद कुछ सवाल हटाकर ठीक नहीं किया जा सकता था। इसलिए इन तीनों विषयों के लिए दोबारा परीक्षा कराने का आदेश दिया गया है।



