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जलमग्न हुई पुरानी टिहरी की यादें अब डोईवाला में होंगी जीवंत, अठूरवाला में बनेगा ऐतिहासिक घंटाघर

डोईवाला, 10 सितंबर, 26. विकास की भेंट चढ़ी पुरानी टिहरी की यादें अब डोईवाला विधानसभा क्षेत्र के कोटि अठूरवाला (टिहरी विस्थापित क्षेत्र)  में जीवंत होंगी। टिहरी की ऐतिहासिक विरासत और यादों को अब डोईवाला का अठूरवाला संजोएगा. देश और प्रदेश के विकास के लिए जब टिहरी बांध परियोजना बनी, तो टिहरी शहर के हजारों परिवारों को अपना घर-बार, खेत-खलिहान और यादें छोड़कर विस्थापित होना पड़ा था. इनमें से बड़ी संख्या में परिवारों को डोईवाला विधानसभा के अठूरवाला क्षेत्र में बसाया गया. विकास की इस बड़ी कीमत के साथ टिहरी का ऐतिहासिक घंटाघर भी टिहरी झील के पानी में समा गया, जिसकी कमी टिहरीवासी आज भी तहेदिल से महसूस करते हैं.

टिहरी की ऐतिहासिक धरोहर याद दिलाएगा डोईवाला का घंटाघर
डोईवाला में बसने के बाद भी बुजुर्गों के मन में वही पुराना टिहरी, वही गलियां और वही घंटाघर रचचा-बसा रहा. अब उन्हीं यादों को ताजा करने और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने के लिए अठूरवाला में भव्य घंटाघर का निर्माण होने जा रहा है. लगभग 98 लाख रुपये की लागत से बनने वाले इस घंटाघर को लेकर टिहरी विस्थापितों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है.

घंटाघर के साथ संंग्रहालय भी बनेगा
विधायक गैरोला ने बताया कि यह सिर्फ एक घंटाघर नहीं होगा, बल्कि इसके साथ-साथ एक भव्य म्यूजियम का निर्माण भी कराया जाएगा. इस म्यूजियम में टिहरी के इतिहास, संस्कृति, पुराने बर्तन, तस्वीरें और धरोहरों को संजोया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ी टिहरी के गौरवशाली इतिहास को जान सके. जल्द ही इसका भूमि पूजन कर निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा.

संस्कृति और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
अठूरवाला में बड़ी संख्या में टिहरी बांध विस्थापित परिवार निवास करते हैं। यह स्मारक न केवल उनकी भावनाओं का सम्मान करेगा, बल्कि क्षेत्र में सांस्कृतिक पर्यटन और स्थानीय रोजगाार के नये अवसर भी पैदा करेगा। नगरपालिकाध्यक्ष नरेंद्र सिंह नेगी सहित क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने इस पहल को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह स्मारक आने वाली पीढ़ियों को पुरानी टिहरी के गौरवशाली अतीत से जोड़े रखेगा।

इस ऐतिहासिक प्रोजेक्ट के लिए जमीन का चयन कर लिया गया है. शासन से इसकी वित्तीय स्वीकृति भी प्राप्त हो चुकी है. टिहरी के डूबने के साथ ही उसका ऐतिहासिक घंटाघर भी जलमग्न हो गया था, जो टिहरी की पहचान था. टिहरी विस्थापितों की लंबे समय से मांग थी कि उनकी सांस्कृतिक धरोहर को कहीं न कहीं स्थापित किया जाए. उनकी भावनाओं को देखते हुए उनके अथक प्रयासों से इस प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली है.
-बृजभूषण गैरोला, विधायक, डोईवाला विधानसभा क्षेत्र

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