UPNL कर्मचारियों का नियमितीकरण मामला, हाईकोर्ट 7 अक्टूबर को करेगा अंतिम सुनवाई

नैनीताल, 24 सितंबर, 26. उत्तराखंड हाईकोर्ट में 24 सितंबर गुरुवार को प्रदेश के सरकारी विभागों में सालों से लगे UPNL उपनल संविदा कर्मचारियों को आदेश होने के बाद भी सरकार द्वारा नियमित नहीं करने और उन्हें चयनित वेतनमान नहीं दिए जाने तथा उनको दिए गए वेतन से जीएसटी आदि काटे जाने के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई की.
सुनवाई के बाद, कोर्ट ने UPNL संविदा कर्मचारियों के हक में कहा कि, सरकार के द्वारा अभी तक कोई निर्णय न लेते हुए कोर्ट अगली तिथि को इस मामले पर अंतिम सुनवाई करेगी. इस मामले में सात अक्टूबर की तिथि नियत की है.
आज मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ में हुई. सुनवाई पर राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि, इनके नियमतिकरण के लिए सरकार को नियमावली में संशोधन करना पड़ेगा, इसलिए उन्हें समय दिया जाए. जिस पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि, पूर्व के आदेशों पर आज तक सरकार ने कोई निर्णय नहीं लिया, जो अपने आप में अवमानना है. हर समय कोर्ट से समय दिए जाने की मांग की जाती है.
दूसरी तरफ, संघ की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि, उन्हें समान कार्य समान वेतन दिए जाने के लिए उनसे बॉन्ड भरने का दवाब डाला जा रहा है, जो गलत है. मामले के मुताबिक, 1 वर्ष से प्रदेश सरकार द्वारा कोर्ट के आदेश का पालन न कर कोर्ट से सरकार द्वारा बार-बार अतिरिक्त समय की मांग की जा रही है, जिसे लेकर प्रदेश भर के उपनल कर्मियों में आक्रोश है. मामले के अनुसार, UPNL कर्मचारी संघ द्वारा उच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दायर कर कहा गया है कि, 2018 में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उपनल संविदा कर्मचारियों को सरकारी नौकरी में नियमितीकरण का आदेश दिया था. जिसके बाद सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई.
सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकार को 2024 में झटका और संविदा कर्मचारियों के हक में फैसला दिया था. जब हाईकोर्ट में इस पूरे मामले में अवमानना याचिका दाखिल हुई तो सरकार पिछले 1 साल से इसको लटकाती रही है. न सरकार कोर्ट के आदेश का अनुपालन कर रही है न ही उन्हें नियमित करने के लिए कोई कदम उठा रही है. आदेश का अनुपालन न होने की वजह से 22 हजार उपनल कर्मचारी अधर में लटके पड़े हैं.



