मसूरी शरदोत्सव में उत्तराखंडी कलाकारों गजेंद्र, संगीता, मंजू, मनोज और वीरेंद्र ने बांधा समा

मसूरी, 8 अक्टूबर, 26. करीब 12 साल बाद आयोजित हो रहा मसूरी शरदोत्सव इन दिनों लोकसंस्कृति और संगीत के रंग में रंगा हुआ है. शरदोत्सव की दूसरी शाम खास तौर पर उत्तराखंड के लोक कलाकारों के नाम रही. टाउन हॉल में आयोजित स्टार नाइट में संगीता ढौंडियाल, मनोज सागर, गजेंद्र राणा, मंजू नौटियाल, मन्नू वंदना और वीरेंद्र सिंह पंवार समेत कई कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का मनोरंजन किया. लोकप्रिय पहाड़ी गीतों की धुन पर देर रात तक दर्शक झूमते नजर आए.

12 साल बाद मिला लोक कलाकारों को बड़ा मंच
शरदोत्सव की वापसी को उत्तराखंड के कलाकारों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. कलाकारों का कहना है कि मसूरी का शरदोत्सव लंबे समय से सांस्कृतिक आयोजनों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच रहा है. करीब 12 साल के अंतराल के बाद दोबारा आयोजन होने से कलाकारों में भी उत्साह है. कलाकारों ने कहा कि इस बार खास बात यह है कि शरदोत्सव में उत्तराखंड के स्थानीय और लोक कलाकारों को प्रमुखता दी जा रही है. इससे न सिर्फ स्थापित कलाकारों को दर्शकों के सामने प्रस्तुति देने का अवसर मिल रहा है, बल्कि नए कलाकारों के लिए भी आगे बढ़ने की संभावनाएं बन रही हैं.
पहाड़ी संगीत अब सिर्फ पहाड़ तक सीमित नहीं
स्टार नाइट में प्रस्तुति देने पहुंचे कलाकारों ने उत्तराखंड के बदलते संगीत पर भी अपनी राय रखी. उनका कहना है कि पहाड़ी संगीत अब केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं रहा है. सोशल मीडिया, यूट्यूब और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म के कारण उत्तराखंड के गीत देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ विदेशों में रहने वाले लोगों तक भी पहुंच रहे हैं.
कलाकारों के मुताबिक, आज पहाड़ी गीतों में आधुनिक संगीत, नए वाद्ययंत्र और बेहतर तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है. इसके साथ ही गीतों की वीडियो शूटिंग और पिक्चराइजेशन में भी काफी बदलाव आया है. यही वजह है कि युवा पीढ़ी भी पहाड़ी संगीत से जुड़ रही है. उन्होंने कहा कि आधुनिकता के बावजूद पहाड़ी संगीत की असली ताकत उसकी लोकधुन, भाषा और पहाड़ की जीवनशैली है. नए प्रयोगों ने इसे खत्म नहीं किया, बल्कि नए दर्शकों तक पहुंचने का रास्ता खोला है.
नगर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी ने कार्यक्रम में पहुंचे सभी कलाकारों का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि शरदोत्सव को दोबारा शुरू करने के पीछे मुख्य उद्देश्य मसूरी की सांस्कृतिक पहचान को पुनर्जीवित करना और स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का मंच देना है.
करीब 12 साल बाद शरदोत्सव को दोबारा आयोजित किया जा रहा है. नगर पालिका का प्रयास है कि इसमें उत्तराखंड की लोकसंस्कृति को विशेष स्थान मिले. स्थानीय कलाकारों को मंच देने के साथ-साथ देश के दूसरे हिस्सों की सांस्कृतिक टीमों को भी मसूरी बुलाया जा रहा है, ताकि पर्यटकों और स्थानीय लोगों को देश की सांस्कृतिक विविधता देखने को मिले.
-मीरा सकलानी, नगर पालिका अध्यक्ष



