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PHC दुगड्डा में अव्यवस्थाएं मिलने पर डीएम ने प्रभारी चिकित्साधिकारी का वेतन रोका

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कोटद्वार, 30 अप्रैल। जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने PHC प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र दुगड्डा का औचक निरीक्षण कर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का विस्तृत जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने जर्जर भवन, चिकित्सा सुविधाओं की कमी और व्यवस्थागत खामियों पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए।

PHC दुगड्डा के जर्जर भवन को ध्वस्त कर मरम्मत के निर्देश
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने पीएचसी भवन की जर्जर स्थिति पर सख्त रुख अपनाते हुए निर्देशित किया कि यदि भवन उपयोग योग्य नहीं है तो उसे ध्वस्त किया जाए, अन्यथा प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत कार्य कराया जाए। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की प्रचार सामग्री के लंबे समय से भंडारण पर भी उन्होंने नाराजगी जताई और इसे ग्रामीण क्षेत्रों में शीघ्र वितरित करने के निर्देश दिए।

ओपीडी, दवा वितरण, बायोमेट्रिक उपस्थिति का डीएम ने लिया जायजा
निरीक्षण में फ्री डायग्नोस्टिक सेवा के प्रतिनिधि ओपीडी समय पर अनुपस्थित पाए गए, जिस पर जिलाधिकारी ने उनके बिल भुगतान पर रोक लगाने के निर्देश मुख्य चिकित्साधिकारी को दिए। लैब टेक्नीशियन और डायग्नोस्टिक सुविधाओं के अभाव को गंभीर लापरवाही मानते हुए प्रभारी चिकित्साधिकारी का वेतन रोक दिया गया। साथ ही मुख्य चिकित्साधिकारी को व्यवस्थाओं की समीक्षा कर आवश्यक सुधार सुनिश्चित करने को कहा गया। जिलाधिकारी ने ओपीडी, दवा वितरण, बायोमेट्रिक उपस्थिति, दवा भंडारण और उपलब्धता की भी जांच की। उन्होंने दवाओं का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार कर नियमित अद्यतन रखने पर जोर दिया, ताकि पारदर्शिता और निगरानी बेहतर हो सके।

क्षेत्र में बढ़ते बीपी और हाइपरटेंशन के मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए जिलाधिकारी ने इनके प्रभावी उपचार और निगरानी के निर्देश दिए। आशा कार्यकर्ताओं से संवाद करते हुए उन्होंने संस्थागत प्रसव बढ़ाने पर विशेष जोर दिया और पिछले चार माह में कराए गए प्रसवों का सत्यापन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा। निरीक्षण में पाया गया कि जमीनी स्तर पर निगरानी प्रभावी नहीं है, जिस पर उन्होंने तत्काल सुधार के निर्देश दिए। अस्पताल में उपकरणों, शल्य कक्ष, लैब, पेयजल और शौचालय व्यवस्थाओं का भी निरीक्षण किया गया। उपकरणों का स्टॉक रजिस्टर नहीं मिलने पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताते हुए अद्यतन रजिस्टर तैयार करने और उपकरणों के समुचित रखरखाव के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने लेडी मेडिकल ऑफिसर को निर्देशित किया कि आगामी दो माह में प्रसव संभावित महिलाओं से नियमित संपर्क बनाए रखते हुए बर्थ प्लानिंग सुनिश्चित की जाए। साथ ही मुख्य चिकित्साधिकारी को नियमित निरीक्षण, समीक्षा बैठकें आयोजित करने और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार लाने के निर्देश दिए।

इस अवसर पर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. शिवमोहन शुक्ला, प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. अश्वनी, नायब तहसीलदार राजेंद्र सेमवाल, खंड विकास अधिकारी विद्यादत्त रतूड़ी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

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