
नैनीताल, 19 मई। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने प्रदेश के सरकारी विभागों में वर्षों से लगे उपनल संविदा कर्मचारियों को आदेश होने के बाद भी सरकार द्वारा नियमित नहीं करने और उन्हें चयनित वेतनमान नहीं दिये जाने तथा उनको दिए गए वेतन से जीएसटी काटे जाने के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई की.
सरकार बोली कि इससे 1300 करोड़ का अतिरिक्त भार बढ़ेगा
आज हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की तरफ से कोर्ट को अवगत कराया गया कि इनको नियमित करने पर राज्य सरकार के ऊपर 1300 सौ करोड़ का अतरिक्त भार पड़ेगा. सरकार को इसके लिए अतरिक्त समय दिया जाये. याचिकाकर्ताओं की तरफ से कहा गया कि सरकार कोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं करना चाह रही है. बार बार कोर्ट से समय मांगे जा रही है. यह कोर्ट के आदेशों का उलंघन है. जिस पर कोर्ट ने सरकार से कहा अगले 28 मई को सरकार ने क्या निर्णय लिया कोर्ट को अवगत कराये.
कर्मियों की तरफ से प्राथमिकता पर सुनवाई की मांग की गयी थी
मामले के अनुसार संविदा कर्मचारी संघ के अधिवक्ताओं ने कोर्ट के समक्ष उनका पक्ष रखते हुए कहा कि पूर्व मे कोर्ट की खंडपीठ ने उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण के सम्बंध में एक आदेश जारी किया था. इस आदेश पर अब तक राज्य सरकार की तरफ से कोई निर्णय नहीं लिया गया, न ही इसे उच्च न्यायलय के रिकॉर्ड में लाया गया है. पूर्व में संघ की ओर से पेश हुए सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता ने इस अवमानना याचिका पर (उत्तराखंड उपनल कर्मचारी संघ बनाम आनन्द बर्धन, मुख्य सचिव उत्तराखंड) की प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई की मांग की गयी थी.



