
यमकेश्वर, 30 मई। उत्तराखंड के उच्च शिक्षा विभाग ने राजकीय महाविद्यालय बिथ्याणी, यमकेश्वर में असिस्टेंट प्रोफेसर इतिहास के पद पर तैनात डाॅ. उमेश त्यागी को बेहद सख्त और बड़ी कार्रवाई करते हुए सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। विभागीय जांच में उनके शैक्षणिक दस्तावेज (मार्कशीट) फर्जी पाए गए। विभागीय अधिकारियों के अनुसार डॉ. उमेश त्यागी की नियुक्ति राजकीय महाविद्यालय बिथ्याणी, यमकेश्वर में कला संकाय में असिस्टेंट प्रोफेसर इतिहास के पद पर हुई थी।
शिकायत के बाद बैठी थी उच्च स्तरीय जांच
प्राप्त जानकारी के अनुसार डा. उमेश त्यागी की नियुक्ति के समय जमा किये गये शैक्षणिक अभिलेखों की प्रामाणिकता को लेकर विभाग को एक शिकायत मिली थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उच्च शिक्षा विभाग ने मामले की उच्च स्तरीय गोपनीय जांच के आदेश दिये थे। जांच के दौरान डा. त्यागी द्वारा प्रस्तुत की गयी बीए (प्रथम, द्वितीय और तृतीय वर्ष) की अंकतालिकाओं marksheets में गंभीर विसंगतियां पाई गईं।
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (CCS) से खुली पोल
संदेह होने पर उच्च शिक्षा विभाग ने संबंधित दस्तावेजों के सत्यापन के लिए चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ से संपर्क किया। जब विश्वविद्यालय के गोपनीय विभाग ने अपने आधिकारिक रिकार्ड्स से डॉ. त्यागी के अंक प्रमाण पत्रों का मिलान किया तो वे हैरान रह गये। विश्वविद्यालय के आधिकारिक रिकार्ड्स में डॉ त्यागी के नाम या रोल नंबर से जुड़े ऐसे किसी भी शैक्षणिक दस्तावेज का कोई अस्तित्व ही नहीं था। जांच में साफ हो गया कि नौकरी पाने के लिए ये डिग्रियां और अंक प्रमाण पत्र पूरी तरह से जाली तैयार किये गये थे।
सुनवाई में नहीं हुए शामिल, सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त की गई
विभागीय जांच के दौरान डॉ उमेश त्यागी को अपना पक्ष रखने और व्यक्तिगत सुनवाई का पूरा अवसर दिया गया था, लेकिन वह अपना स्पष्टीकरण देने के लिए उपस्थित नहीं हुए। इसके बाद उत्तराखंड सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली के तहत उनकी सेवा समाप्ति (बर्खास्तगी) का एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर सूबे के उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत के समक्ष प्रस्तुत किया गया। उच्च शिक्षा मंत्री ने बिना समय गंवाये इस प्रस्ताव को तुरंत अनुमोदन (मंजूरी) कर दिया, जिसके बाद देहरादून सचिवालय से उनकी बर्खास्तगी के आदेश जारी कर दिये गये।
उच्च शिक्षा संस्थानों की गरिमा और युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का छल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर नौकरी प्राप्त करना गंभीर अपराध है। बिथ्याणी महाविद्यालय में फर्जी प्रमाण पत्रों से नियुक्ति पाने वाले शिक्षक को बर्खास्त कर दिया गया है। भविष्य में भी यदि ऐसे मामले सामने आते हैं तो दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। -धन सिंह रावत, उच्च शिक्षा मंत्री



