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राम मंदिर दान घोटाला पहुंचा हाईकोर्ट, SIT की जांच रिपोर्ट के बाद आरोपियों पर कार्रवाई की तैयारी

लखनऊ, 24 जून। अयोध्या राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान (चढ़ावे) और धन के गबन के मामले में एसआईटी (SIT) ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी है। इस रिपोर्ट में दान की गिनती व निगरानी व्यवस्था में गंभीर खामियां उजागर हुई हैं। जांच कमेटी ने 23 जून को अपनी प्राथमिक रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंंप दी है। 13 जून को तीन सदस्यीय विशेष जांच कमेटी का गठन किया गया था।

इसके आधार पर कई कर्मचारियों और सेवादारों पर कार्रवाई की तैयारी चल रही है। मामले की विस्तृत जानकारी निम्नलिखित है-

एसआईटी जांच (SIT Probe)
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी जिसमें लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत IAS, आईजी किरण एस IPS और विशेष सचिव वित्त नील रतन ने दान पेटियों से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और बैंक स्टेटमेंट की जांच की है।

प्राथमिक रिपोर्ट
एसआईटी ने अपनी 140 से 150 पन्नों की रिपोर्ट गृह विभाग को सौंप दी है और अंतिम रिपोर्ट तैयार करने के लिए टीम अभी भी साक्ष्य जुटा रही है। सूत्रों के मुताबिक जांच टीम को कैश काउंटिंग, सुरक्षा की जांच में बड़ी कमियां और सीसीटीवी फुटेज में संदिग्ध गतिविधियां पाई गयी हैं।

कर्मचारियों पर कार्रवाई
जांच में गंभीर कमियां पाए जाने के बाद दान की गिनती में लगे कई कर्मचारियों पर विभागीय कार्रवाई तय मानी जा रही है। कमेटी ने 17 लोगों को आरोपी के रूप में नामजद किया है। इसमें श्री राम जन्म भूमि ट्रस्ट के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों, बैंक कर्मचारियों, सेवादारों और गिनती करने वाले कर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाई गयी है।

राजनीतिक दबाव
मामले में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए विपक्षी दलों (जैसे कांग्रेस) द्वारा इस रिपोर्ट को सार्वजनिक करने और सीबीआई जांच की मांग की जा रही है। मंदिर प्रशासन का कहना है कि दान की प्रक्रिया बेहद पारदर्शी है और सभी चढ़ावों का लेखा-जोखा नियमों के तहत ही रखा जाता है।

मामला हाईकोर्ट पहुंचा
यह मामला अब लखनऊ हाईकोर्ट भी पहुंच चुका है। अधिवक्ता मोतीलाल द्वारा एक याचिका में मांग की गयी है कि ट्रस्ट के बैंक खातों और शक्तियों को फ्रीज किया जाये, अयोध्या के जिला जज को ट्रस्ट का रिसीवर नियुक्त किया जायेग और किसी रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग बनाकर इसकी निष्पक्ष जांच कराई जाए।

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