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‘मीरी-पीरी’ के प्रवर्तक और सिख पंथ के छठे गुर, गुरु हरगोबिंद साहिब जी को परमार्थ निकेतन ने समर्पित की विशेष गंगा आरती

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ऋषिकेश, 30 जून। सिख पंथ के छठे गुरु, ‘मीरी-पीरी’ के प्रवर्तक एवं महान सैन्य-संत गुरु श्री हरगोबिंद साहिब जी महाराज के प्रकाश पर्व पर परमार्थ निकेतन में विशेष गंगा आरती समर्पित की गई। इस अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष एवं परमार्थ पीठाधीश्वर स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने श्रद्धालुओं को प्रकाश पर्व की शुभकामनाएं देते हुए गुरु साहिब के जीवन और शिक्षाओं को वर्तमान समय में अत्यंत प्रासंगिक बताया।

धर्म, अध्यात्म, साहस, करुणा का अद्भुत संगम हैं गुु हरगोबिंद साहिब जी: चिदानंद सरस्वती
स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि गुरु हरगोबिंद साहिब जी का जीवन धर्म, अध्यात्म, साहस, करुणा, आत्मसम्मान और राष्ट्रसेवा का अद्भुत संगम है। उन्होंने ‘मीरी-पीरी’ के सिद्धांत के माध्यम से यह संदेश दिया कि आध्यात्मिक शक्ति और सामाजिक उत्तरदायित्व एक-दूसरे के पूरक हैं। शास्त्र का ज्ञान और शस्त्र का साहस दोनों का संतुलन ही धर्म और न्याय की रक्षा का मार्ग है।

उन्होंने कहा कि गुरु साहिब का जीवन अन्याय, अत्याचार और भय के विरुद्ध निर्भीक होकर खड़े होने की प्रेरणा देता है। आज जब विश्व हिंसा, असहिष्णुता, सामाजिक विभाजन और नैतिक मूल्यों के संकट से जूझ रहा है, तब उनकी शिक्षाएं मानवता, न्याय, सेवा और प्रेमपूर्ण सहअस्तित्व का मार्ग दिखाती हैं।

हरगोबिंद साहिब जी के आदर्शों को अपनाने पर जोर
स्वामी जी ने युवाओं से संतों और महापुरुषों के आदर्शों से प्रेरणा लेकर चरित्र निर्माण, सत्य, नैतिकता, राष्ट्रसेवा और मानवता के मार्ग पर चलने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अनुशासित और समर्पित युवा ही समाज और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य का आधार बन सकते हैं। प्रकाश पर्व के अवसर पर परमार्थ निकेतन परिवार ने देश-विदेश के सभी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए गुरु श्री हरगोबिंद साहिब जी महाराज के आदर्शों को जीवन में अपनाने का संदेश दिया।

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