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अंकिता भंडारी हत्याकांड में ‍CBI की धीमी जांच को लेकर लोगों ने देहरादून में सीबीआई कार्यालय का घेराव कर हंगामा किया

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देहरादून, 2 जुलाई, 26 अंकिता भंडारी हत्याकांड में सीबीआई जांच की धीमी रफ्तार पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं. इस मसले पर गुरुवार दो जुलाई को अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच से जुड़े लोगों ने देहरादून के सीमा द्वार में स्थित सीबीआई कार्यालय का घेराव किया. भारी बारिश के प्रदर्शनकारियों ने अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिए हल्लाबोल किया.

बताया जा रहा है कि पुलिस ने भी अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच के विरोध-प्रदर्शन को देखते हुए सीबीआई कार्यालय के मुख्य द्वार पर प्रदर्शनकारियों को बैरिकेडिंग लगाकर रोकने का प्रयास किया था. फिर भी कुछ आंदोलनकारी महिलाओं ने सीबीआई के दूसरे प्रवेश द्वार पर पहुंच कर प्रतीकात्मक रूप से तालाबंदी की. आंदोलनकारियों ने जांच की वर्तमान स्थिति, कथित वीआईपी की पहचान, कुछ नामों से पूछताछ, बुलडोजर कार्रवाई और साक्ष्य मिटाने के आरोपों सहित कई मुद्दों पर जवाब मांगे। जवाबों से असंतुष्ट प्रदर्शनकारियों ने मुख्य द्वार पर भी प्रतीकात्मक ताला लगा दिया।

इस दौरान अंकिता भंडारी प्रकरण को लेकर संयुक्त संघर्ष मंच के कार्यकर्ताओं के साथ सीबीआई अधिकारियों की वार्ता भी हुई, जहां अधिकारियों के समक्ष अंकिता मामले को लेकर कुछ सवाल भी उठाए गए और वर्तमान स्थिति पर जवाब मांगा गया. कार्यालय के बाहर मंच से जुड़े लोगों ने जमकर नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया.

अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच के मोहित डिमरी ने कहा कि इस मामले की सीबीआई जांच को संस्तुति किए 6 महीने का समय होने जा रहा है, लेकिन जांच कहां पर अटकी हुई है, यह समझ से परे है. उन्होंने बताया कि मंच ने पहले भी इस बात को सीबीआई अधिकारियों के समक्ष रखा था कि अंकिता को न्याय दिलाने के लिए जो जांच सीबीआई की चल रही है, वह कहां तक पहुंची, लेकिन अभी तक कोई जानकारी नहीं दी गई है.

डिमरी ने कहा कि इस प्रकरण में कथित वीआईपी कौन है और क्या उनसे पूछताछ की गई है. रिजॉर्ट में बुलडोजर चलाकर संभावित साक्ष्य मिटाने वालों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई है? 6 महीने बाद भी सीबीआई जांच में कितनी प्रगति हुई है. अंकिता भंडारी के माता-पिता को अब तक सीबीआई ने क्यों नहीं बुलाया? ऐसे कई सवाल हैं, जिनके जवाब जानने के लिए आज मंच से जुड़े लोगों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया है.

कार्यक्रम में कमला पंत, सुजाता पॉल, निर्मला बिष्ट, त्रिलोचन भट्ट, मोहित डिमरी, अधिवक्ता अलमास सिद्दीकी, शंकर गोपाल, ललित उत्तराखंडी, मनीष सुंदरियाल, विनोद कुमार धस्माना सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखे। इस दौरान जनगीत भी प्रस्तुत किए गए।

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