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उपनलकर्मियों के ‘समान काम समान वेतन’ मामले में हाईकोर्ट का आदेश भी दरकिनार, अब एक हफ्ते का अल्टीमेटम

देहरादून, 29 जुलाई, 26. उत्तराखंड में उपनलकर्मियों समान काम के बदले समान वेतन का लाभ दिलाने की प्रक्रिया अब भी पूरी तरह लागू नहीं हो सकी है. नैनीताल हाईकोर्ट के साल 2018 के आदेश के बावजूद कई विभागों में कर्मचारियों के साथ आवश्यक अनुबंध नहीं किए गए हैं. ऐसे में सैनिक कल्याण विभाग ने सभी विभागों के सचिवों और प्रमुख सचिवों को एक हफ्ते के भीतर लंबित अनुबंध प्रक्रिया पूरी कर इसकी रिपोर्ट शासन को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं.

समान काम समान वेतन मामले में शासन को करना पड़ा हस्तक्षेप
दरअसल, उपनल कर्मचारियों को समान कार्य के बदले समान वेतन का लाभ दिए जाने के लिए विभागीय स्तर पर अनुबंध प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है, लेकिन सालों बीत जाने के बावजूद कई विभाग इस दिशा में जरूरी कार्रवाई नहीं कर पाए हैं. यही वजह है कि अब शासन को सीधे हस्तक्षेप करना पड़ा है.

सचिव युगल किशोर पंत ने सभी विभागों को भेजा पत्र
सैनिक कल्याण विभाग के सचिव युगल किशोर पंत ने इस संबंध में सभी विभागों के सचिव और प्रमुख सचिव को पत्र भेजा है. पत्र में उत्तराखंड हाईकोर्ट के साल 2018 के आदेश का जिक्र करते हुए पूछा गया है कि संबंधित विभागों में कितने उपनल कर्मचारियों के साथ आवश्यक अनुबंध किए जा चुके हैं और कितने कर्मचारियों के मामले अभी लंबित हैं? साथ ही निर्देश दिए गए हैं कि एक हफ्ते के भीतर लंबित अनुबंध प्रक्रिया पूरी कर विस्तृत जानकारी शासन को उपलब्ध कराई जाए.

हाईकोर्ट के आदेशों का करना होगा पालन
शासन की चिंता केवल कर्मचारियों को उनका अधिकार दिलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि हाईकोर्ट के आदेशों का पालन सुनिश्चित करना भी इसकी बड़ी वजह है. लंबे समय से आदेश के अनुपालन में देरी होने के कारण सरकार पर भी सवाल उठ रहे हैं. हालांकि, कुछ विभागों ने गंभीरता दिखाते हुए अनुबंध प्रक्रिया पूरी कर ली है, लेकिन अब भी कई विभाग ऐसे हैं, जहां इस दिशा में काम अधूरा है.

समान कार्य के बदले समान वेतन मांग रहे हैं उपनलकर्मी
उपनल कर्मचारी लंबे समय से समान कार्य के बदले समान वेतन की मांग कर रहे हैं. कर्मचारियों का कहना है कि वे नियमित कर्मचारियों की तरह ही जिम्मेदारियां निभाते हैं, लेकिन वेतन और अन्य सुविधाओं में भारी अंतर है. हाईकोर्ट के आदेश के बाद कर्मचारियों को उम्मीद जगी थी कि उन्हें न्याय मिलेगा, लेकिन विभागीय स्तर पर धीमी कार्रवाई के कारण मामला लंबे समय से अटका हुआ है.

हाईकोर्ट के आदेश का पालन सरकार को प्राथमिकता के आधार पर करना चाहिए. उम्मीद है कि अब जब शासन ने एक हफ्ते की समय-सीमा तय कर दी है, तो सभी विभाग अनुबंध प्रक्रिया पूरी करेंगे और कर्मचारियों को समान काम के बदले समान वेतन का लाभ मिल सकेगा.
– विनोद कवि, अध्यक्ष, उपनल कर्मचारी संगठन ऊर्जा निगम

क्या बोले सैनिक कल्याण विभाग के सचिव युगल किशोर पंत? वहीं, सैनिक कल्याण विभाग के सचिव युगल किशोर पंत ने भी पुष्टि की कि इस संबंध में सभी विभागों को पत्र भेज दिया गया है. उन्होंने कहा कि,

शासन का प्रयास है कि उपनल कर्मचारियों को समयबद्ध तरीके से हाईकोर्ट के आदेश का लाभ मिले. इसी उद्देश्य से विभागों से विस्तृत जानकारी मांगी गई है और 7 दिन के भीतर आवश्यक कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं.
– युगल किशोर पंत, सचिव, सैनिक कल्याण विभाग

शासन ने विभागों से केवल अनुबंध की स्थिति ही नहीं मांगी है, बल्कि ये भी पूछा है कि उपनल के माध्यम से कुल कितने कर्मचारी कार्यरत हैं? उनमें से कितने कर्मचारियों के साथ अनुबंध प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और कितने कर्मचारी अभी इससे वंचित हैं? इस पूरी कवायद का उद्देश्य लंबित मामलों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करना और जल्द से जल्द सभी पात्र कर्मचारियों को आदेश का लाभ दिलाना है.

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