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बदरीनाथ के तप्त कुंड में 15 मिनट से ज्यादा की डुबकी पड़ सकती है सेहत पर भारी

चमोली, 25 सितंबर, 26. 11 सितंबर की सुबह बदरीनाथ मंदिर के पास राजस्थान में रहने वाली दो बहनों की जान चली गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, एक महिला की उम्र 71 वर्ष और दूसरी महिला की उम्र 63 वर्ष थी और वे आस्था में सराबोर होकर बदरीनाथ धाम में स्थित तप्त कुंड में 108 डुबकी लगा रही थीं। इस हादसे पर खुद को बद्रीनाथ के पंडे बताने वाली कंटेंट क्रिएटर अपूर्वा ध्यानी ने जानकारी दी कि किसी को भी बदरीनाथ के तप्त कुंड में 10 से 15 मिनट से ज्यादा का वक्त नहीं बिताना चाहिए। बता दें कि बदरीनाथ मंदिर में जाने से पहले इसी तप्त कुंड में नहाकर खुद को शुद्ध किया जाता है।

ब्लड प्रेशर का अचानक गिरना, हृदय पर अत्यधिक दबाव
बदरीनाथ धाम में स्थित तप्त कुंड का जल प्राकृतिक रूप से भू-तापीय geothermal ऊष्मा और सल्फर (गंधक) के कारण गर्म रहता है, जिसका औसत तापमान 45 से 55 डिग्री सेंटीग्रेट तक होता है। इस कुंड में 15 मिनट से अधिक देर तक नहाना स्वास्थ्य के लिए गंभीर और घातक जोखिम पैदा कर सकता है।  जब यह पानी शरीर पर पड़ता है तो मांसपेशियां रिलैक्स हो जाती हैं और नसें डाइलेट (चौड़ी) हो जाती हैं। इससे रक्तचाप नीचे आ जाता है यानी ब्लड प्रेशर कम हो जाता है और इससे शरीर रिलैक्स हो जाता है। यदि किसी को स्किन एलर्जी होती है तो वो ही ठीक होने की संभावना होती है और पानी के तापमान के कारण शरीर में जो दर्द होते हैं, वो भी ठीक होने की संभावना होती है। इसी कारण लोग लोभ में आकर थोड़ा सा समय और बिता लेते हैं।

सल्फर व गैसों का वाष्पीकरण
तप्त कुंड के आसपास सल्फर गंधक, हाइड्रोजन सल्फाइड और भाप का घनत्व अधिक होता है। अधिक देर तक इस भाप और गैसों को सांस के जरिये अंद खींचने से फेफड़ों में आक्सीजन का स्तर घट सकता है और सांस फूलने की समस्या हो सकती है।

बहुत गर्म पानी में जाने से काफी सारा खून स्किन के पास मौजूद ब्लड वेसल्स की तरफ चला जाता है, जिससे बीपी गिर जाता है। इसकी वजह से दिल भी तेजी से काम करने लगता है, जिससे दिल पर भी प्रेशर बढ़ता है। गर्म पानी में देर तक बैठने से व्यक्ति का दिल दो तरह के दबाव झेल रहा होता है। बुजुर्ग व्यक्ति, दिल के मरीज या बीपी की दवा लेने वालों के लिए यह स्थिति कार्डियक समस्याओं का कारण बन सकती है। इसके अलावा, शरीर गर्म पानी में तेजी से पसीना बहाता है, जो गीले होने की वजह से हमें दिखता नहीं है। शरीर से निकल रहा है ये फ्लूइड डिहाइड्रेशन और लो बीपी का कारण बनता है। अगर कोई अचानक खड़ा होता है, तो चक्कर आने से गिरने और गिरकर चोट लगने का खतरा बनता है। पानी में बेहोश होने से डूबने का खतरा भी रहता है।
डॉ. अजय फडके, डायरेक्टर, Agilus Diagnostics

डॉक्टर के मुताबिक, बदरीनाथ धाम में हाल में हुए हादसे का संबंध ऊंचाई से भी है। 3000 मीटर से भी ज्यादा की ऊंचाई पर ऑक्सीजन कम होती है तो दिल पहले से दबाव झेल रहा होता है। जब आप थके, कम नींद लिए, डिहाइड्रेटेड होकर गर्म पानी में ज्यादा देर तक रहते हैं तो दिल पर और ज्यादा प्रेशर पड़ता है।

डाक्टरों के अनुसार यदि नहाते समय थोड़ा भी चक्कर आए, घबराहट हो या सांस फूले, तो तुरंत कुंड से बाहर निकलें, थोड़ा सामान्य पानी पीएं और आराम करें। बुजुर्ग, हृदयरोगी, हाई/लो बीपी की दवा लेने वाले यात्री और अस्थमा के मरीज कुंड में पूरी डुबकी लगाने से बचें। वे चाहें तो मग से केवल हाथ-पैर धोकर या थोड़ा जल छिड़ककर स्नान की औपचारिकता पूरी कर सकते हैं।

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