
देहरादून, 6 नवम्बर, 26. उत्तराखंड की लोक संस्कृति, पहाड़ी संगीत और क्षेत्रीय सिनेमा में अपना जीवन समर्पित करने वाले प्रसिद्ध लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। उत्तराखंड में ‘नेगी दा’ और ‘गढ़ रत्न’ के नाम से मशहूर नरेंद्र सिंह नेगी को यह सम्मान वर्ष 2024 के लिए दिया गया है। 6 नवंबर को उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर देहरादून के ऐतिहासिक परेड ग्राउंड में आयोजित राज्योत्सव समारोह में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संयुक्त रूप से उन्हें पुरस्कार प्रदान किया। सम्मान के तहत नरेंद्र सिंह नेगी को दो लाख रुपये की नकद राशि और प्रशस्ति पत्र दिया गया।
नरेंद्र सिंह नेगी उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोकगायक, गीतकार, संगीतकार और कवि हैं। उनका जन्म 12 अगस्त 1949 को पौड़ी गढ़वाल में हुआ था। उत्तराखंड की लोक संस्कृति और पहाड़ी संगीत को अपनी आवाज देने वाले नरेंद्र सिंह नेगी को लोग आदर से ‘नेगी दा’ कहते हैं। उन्हें ‘गढ़ रत्न’, ‘पहाड़ की आवाज’ और ‘सुर सम्राट’ जैसी उपाधियों से भी जाना जाता है।
नरेंद्र सिंह नेगी ने अपने संगीत के माध्यम से उत्तराखंड की लोक संस्कृति, परंपराओं और जनभावनाओं को अभिव्यक्ति दी है। उनके गीतों में पहाड़ की जिंदगी, सामाजिक परिस्थितियों और उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान की झलक मिलती है।
1974 में शुरू किया संगीत का सफर
नरेंद्र सिंह नेगी ने अपने पेशेवर संगीत सफर की शुरुआत वर्ष 1974 में की थी। उनका पहला आधिकारिक एल्बम ‘गढ़वाली गीतमाला’ वर्ष 1976 में आया। इस एल्बम ने उन्हें उत्तराखंड में व्यापक लोकप्रियता दिलाई। उन्होंने अब तक सैकड़ों लोकगीतों को अपनी आवाज और कलम दी है। उनके लोकप्रिय गीतों में ‘ठंडो रे ठंडो बोल्दू पहाड़ा की हवा ठंडी’ और ‘काफल पाको मीनू पाको’ जैसे गीत शामिल हैं। ये गीत उत्तराखंड की लोक संस्कृति और संगीत की पहचान बन चुके हैं।
उत्तराखंड की लोक संस्कृति को दी नई पहचान
नरेंद्र सिंह नेगी ने पिछले पांच दशकों से अपने गीतों के माध्यम से उत्तराखंड की लोक संस्कृति, परंपराओं, पहाड़ी त्योहारों और जनजीवन को स्वर दिया है। उनके गीतों में पहाड़ों से पलायन की पीड़ा, पर्यावरण संरक्षण, महिलाओं के संघर्ष और आम जनमानस के सुख-दुख जैसे विषयों को भी जगह मिली है। उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान भी उनके जनपक्षीय और आंदोलनात्मक गीतों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ‘उठा जागा उत्तराखंडियों’ जैसे गीतों ने अलग राज्य की मांग के दौरान लोगों में जागरूकता और आंदोलन की भावना को मजबूत किया।
गढ़वाली फिल्मों में भी दिया योगदान
नरेंद्र सिंह नेगी ने उत्तराखंड के क्षेत्रीय सिनेमा में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने प्रसिद्ध गढ़वाली फिल्मों ‘घरजवैं’, ‘चक्रचाल’ और ‘मेरी गंगा होलि त मैमा आलि’ में संगीत दिया। लोक संगीत के साथ-साथ क्षेत्रीय सिनेमा में उनके योगदान ने उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
संगीत नाटक अकादमी और उत्तराखंड गौरव सम्मान से भी नवाजे जा चुके
नरेंद्र सिंह नेगी को उनके संगीत और सांस्कृतिक योगदान के लिए पहले भी कई प्रतिष्ठित सम्मान मिल चुके हैं।
संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार: वर्ष 2022 में उन्हें संगीत के क्षेत्र में प्रतिष्ठित संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
उत्तराखंड गौरव सम्मान: वर्ष 2021 में उन्हें उत्तराखंड सरकार के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल उत्तराखंड गौरव सम्मान से नवाजा गया।
गढ़ रत्न की उपाधि: उत्तराखंड की लोक संस्कृति और संगीत में उनके योगदान के लिए उन्हें ‘गढ़ रत्न’ के नाम से भी जाना जाता है।
उत्तराखंड फिल्म नीति-2024 के तहत मिला सम्मान
उत्तराखंड सरकार ने नरेंद्र सिंह नेगी को यह लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड ‘उत्तराखंड फिल्म नीति-2024’ के अंतर्गत प्रदान किया है। इस नीति के तहत क्षेत्रीय सिनेमा, लोक संगीत, कला और संस्कृति के क्षेत्र में जीवन समर्पित करने वाली हस्तियों को सम्मानित करने और प्रोत्साहित करने का उद्देश्य रखा गया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इन पुरस्कारों के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह में अमित शाह और मुख्यमंत्री धामी ने संयुक्त रूप से नरेंद्र सिंह नेगी को दो लाख रुपये की पुरस्कार राशि और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया।
अभिनेता हेमंत पांडे को भी लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड
राज्योत्सव समारोह में उत्तराखंड सरकार ने प्रसिद्ध अभिनेता हेमंत पांडे को भी लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार से सम्मानित किया। उन्हें वर्ष 2025 के लिए यह सम्मान दिया गया। सिनेमा जगत में उत्तराखंड का नाम रोशन करने के लिए हेमंत पांडे को भी दो लाख रुपये की नकद राशि और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया।



