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दिवाली पर कब है लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त ? जानिए संपूर्ण पूजा विधि और नियम

देहरादून, 6 नवम्बर, 26. हर वर्ष कार्तिक माह की अमावस्या तिथि पर दीपावली का त्योहार बड़े ही धूम-धाम के साथ मनाया जाता है। हिंदू धर्म में दिवाली का त्योहार सबसे प्रमुख पर्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस तिथि पर भगवान श्रीराम 14 वर्ष का वनवास पूरा करके माता सीता और लक्ष्मण जी के साथ अयोध्या लौटे थे। प्रभु राम के वापस आने की खुशी में अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर उत्सव मनाया था। दिवाली की रात धन, सुख-समृद्धि की देवी माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व है। ऐसी मान्यता है कि दिवाली पर अमावस्या तिथि और प्रदोष काल में मां लक्ष्मी की पूजा करने से घर में उनका वास होता है और सुख-समृद्धि, धन-वैभव और खुशहाली आती है। इस बार दिवाली 8 नवंबर को है। आइए जानते हैं दिवाली की रात में कब करें मां लक्ष्मी की पूजा? पूजन शुभ मुहूर्त कब का है और घर पर कैसे करें मां लक्ष्मी की पूजा।

शुभ दीपावाली 2026- 8 नवंबर
अमावस्या तिथि प्रारंभ – 8 नवंबर को सुबह 11:27 बजे
अमावस्या तिथि समाप्त -9 नवंबर को रात 12:31 बजे

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त : शाम 5: 54 से 7:50 बजे
प्रदोष काल – शाम 5:31 से 8:09 बजे
वृषभ काल – शाम 5:54 से 7:50 बजे
निशिता काल- रात 11:39 से 12:31
सिंह लग्न – सुबह 12:25 से 02:42

शुभ दीपावाली 2026
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त : निशिता काल
रात 11:39 से 12:31, 09 नवंबर
अवधि- 53 मिनट
सिंह लग्न- सुबह 12:24 से 02:42, 09 नवंबर

लक्ष्मी पूजा- शुभ चौघड़िया मुहूर्त
प्रातः मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत)- सुबह 11:27 से 12:05 तक
अपराह्न मुहूर्त (शुभ) – दोपहर 01:26 से 02:48 तक
सायाह्न मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर)- शाम 05:31 से रात 10:27 तक
रात्रि मुहूर्त (लाभ)- 01:43 से 03:22 तक, 09 नवंबर
उषाकाल मुहूर्त (शुभ)-सुबह 05:00 से 06:39 तक, 09 नवंबर

दिवाली तिथि 2026
हिंदू धर्म में दिवाली पर महालक्ष्मी पूजन का विशेष विधान होता है। दिवाली पर लक्ष्मी पूजन के लिए कार्तिक अमावस्या तिथि में प्रदोष काल में करने का विधान होता है। द्रिक पंचाग के अनुसार कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 8 नवंबर रविवार को सुबह 11 बजकर 27 मिनट से शुरू हो जाएगी और 9 नवंबर सोमवार को सुबह 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगी. उदयातिथि के आधार पर कार्तिक अमावस्या तो 9 नवंबर को होगी, लेकिन अमावस्या तिथि में प्रदोष काल 8 नवंबर को प्राप्त हो रहा है, ऐसे में दीपावली का त्योहार 8 नवंबर, रविवार को है।

दिवाली पर लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त
शास्त्रों में दिवाली पर मां लक्ष्मी का पूजन प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के बाद के तीन मुहूर्त और स्थिर लग्न में करना सबसे उत्तम माना गया है। जब वृषभ, सिंह, वृश्चिक और कुंभ राशि लग्न में उदित हो तो माता लक्षमी की पूजा की जानी चाहिए। इसके अलावा मां लक्ष्मी की पूजा के लिए निशिथ काल का मुहूर्त भी अच्छा माना जाता है। निशित काल का मुहूर्त तांत्रिक पूजा, काली पूजा और महानिशा पूजा के लिए समय उपयुक्त होता है।

दिवाली लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल मुहूर्त
08 नवंबर, रविवार को प्रदोष काल सायं काल 5 बजकर 31 मिनट से 8 बजकर 09 मिनट तक रहेगा, जिसमें वृषभ काल (स्थिर लग्न) 5 बजकर 54 मिनट से 07 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। लक्ष्मी पूजा का प्रदोष काल का मुहूर्त का समय सायं काल 5 बजकर 54 मिनट से लेकर सायं काल 7 बजकर 50 मिनट तक रहेगा।

दिवाली लक्ष्मी पूजन की सरल विधि
दिवाली लक्ष्मी पूजन के लिए जरूरी सामग्री- लकड़ी की चौकी, लाल या पीला कपड़ा, देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्तियां, कुमकुम, चंदन, हल्दी, रोली, अक्षत, पान और सुपारी, साबुत नारियल, अगरबत्ती, घी,पीतल का दीपक या मिट्टी का दीपक, कपास की बत्ती, पंचामृत, गंगाजल, पुष्प, फल, कलश ,जल आम के पत्ते, कपूर, कलावा , दूर्वा घास , जनेऊ, धूप, झाड़ू और नोट और सिक्के

पूजा स्थल पर कैसी करें तैयारी
पूजा के स्थान की अच्छी तरह के साफ-सफाई करें। फिर ईशान कोण में लकड़ी की चौकी रखें। चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं और उस पर अक्षत रखें और गणेश जी और माता लक्ष्मी की मूर्ति स्थापित करें।

लक्ष्मी- गणेश पूजन विधि
कलश स्थापना
चौकी के पास तांबे या पीतल के कलश में शुद्ध जल और गंगाजल भरकर रखें और इसके अंदर एक सिक्का, सुपारी, अक्षत, रोली डाले। फिर कलश के मुख पर आम के पत्ते रखें और उसके ऊपर दिया रखें।
आचमन
इसके बाद हाथ में थोड़ा जल लेकर उसे अपने ऊपर और सभी पूजन सामग्री के ऊपर छिड़काव करें और ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥ मंत्र का जाप करें।
पूजा का संकल्प
आचमन करने के बाद दाहिने हाथ में अक्षत, फल और जल लेकर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश जी से सुख-समृद्धि की प्रार्थना और पूजा का संकल्प लें।

सबसे पहले गणेश पूजन
दिवाली पूजा शुरू करने से पहले सबसे पहले प्रथम पूज्य भगवान गणेश की पूजा करें, जिसमें उन्हें रोली, अक्षत, दूर्वा, मिठाई और धूप अर्पित करें।
मां लक्ष्मी और कुबेर पूजन विधि
भगवान गणेश जी पूजा, वंदना करने के बाद मां लक्ष्मी की पूजा आरंभ करें। मां लक्ष्मी को रोली, कुमकुम, लाल फूल, कमल, खील, बताशे, मिठाई और फल अर्पित करें। इसके बाद तिजोरी में रखन के लिए कुछ सिक्के, पीली कौड़ियां, गोमती चक्र और कमलगट्टे को मां लक्ष्मी के चरणों में रखें। इसके बाद भगवान कुबेर की पूजा करें।

दीप प्रज्वलन विधि
मां लक्षमी की पूजा के दौरान शुद्ध देशी घी का एक चौमुखी दीपक और सरसों के तेल का छोटा दीया जलाएं।

मंत्र जाप
इसके बाद मां लक्ष्मी का ध्यान करते हुए उनके मंत्रों का जाप करें।

मां लक्ष्मी मंत्र- ऊं श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद, ऊं श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:॥

कुबेर मंत्र-ऊं यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं में देहि दा

आरती और क्षमा प्रार्थना
पूजा सामग्री और मंत्रों के जाप के बाद पहले भगवान गणेश की आरती और फिर मां लक्ष्मी की आरती करें। अंत में पूजा में हुई जाने-अनजाने में हुई भूल चूक के लिए क्षमा याचना मांगे।

घर में दीयों से रौशनी
पूजा करने के बाद, घर के सभी जगहों पर दीपक रखें।

दीवाली का त्योहार हमें बुराई से लड़ने और अच्छाई के मार्ग पर चलने की शिक्षा देता है। इस दिव्य अवसर पर, आइए अपने जीवन को माता लक्ष्मी के आशीर्वाद से रोशन करें। शुभ दीपावली!
प्रकाश पर्व दीपावली की आपको परिवार सहित शुभकामनाएं

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