अब इथेनॉल और पानी के मिश्रण से जलेगा चूल्हा, कमर्शियल LPG से भी सस्ता : गडकरी

नई दिल्ली, 25 मई। देश के कुछ हिस्सों से रसोई गैस (LPG) की किल्लत को लेकर खबरें आ रही हैं, जबकि सरकार का कहना है कि स्थिति सामान्य है और देश में रसोई गैस की कोई कमी नहीं है. लेकिन होर्मुज रूट बाधित होने की वजह से परेशानी जरूरी बढ़ी है. क्योंकि बड़े पैमाने पर रसोई गैस आयात की जाती है. इस तकनीक में पानी के अंदर मात्र 7 प्रतिशत इथेनॉल मिलाया जाता है। इस मिश्रण से स्टोव जैसी बेहतरीन और स्वच्छ नीली लौ निकलती है, जो खाना पकाने के लिए पूरी तरह उपयुक्त है।
नई इथेनॉल आधारित स्टोव तकनीक लांच
इस बीच केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने एक नई इथेनॉल-आधारित स्टोव तकनीक (Ethanol-Based Stove Technology) का लॉन्च किया है. नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में इस नई टेक्नोलॉजी के स्टोव को पेश करते हुए गडकरी ने दावा किया कि इसमें कमर्शियल एलपीजी (LPG) सिलेंडरों की तुलना में खाना पकाना सस्ता पड़ेगा. साथ ही पर्यावरण के अनुकूल भी है.
यह इथेनॉल में पानी मिलाकर काम करता है
भारत के बढ़ते बायोफ्यूल मिशन में इसे एक मील के पत्थर के रूप में देखा जा रहा है. यह स्टोव तकनीक पूरी तरह से स्वदेशी है. इस तकनीक की सबसे खास बात यह है कि यह स्टोव सीधे इथेनॉल से नहीं, बल्कि इथेनॉल में पानी मिलाकर (Ethanol mixed with water) काम करता है. इन दोनों के मिश्रण से एक स्वच्छ कुकिंग फ्लेम पैदा होती है. यह तकनीक पारंपरिक LPG सिलेंडरों और केरोसिन की तुलना में सुरक्षित, कम लागत वाला और प्रदूषण मुक्त विकल्प दे रही है.
कामर्शियल LPG से भी सस्ता
गडकरी के मुताबिक जब इस तकनीक की आर्थिक व्यवहार्यता को परखा गया, तो पाया गया कि इस स्टोव पर खाना पकाना बाजार में मिलने वाले कामर्शियल गैस सिलेंडर की तुलना में काफी सस्ता पड़ता है। शुरुआती चरण में इसे बड़े स्टोव जैसे होटलों, कैटरिंग और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए डिजाइन किया जा रहा है, जिसे बाद में घरेलू रसोइयों तक भी पहुंचाया जा सकता है।
दरअसल, पिछले एक दशक में भारत ने इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम में काफी बेहतरीन काम किया है. साल 2014 में जहां पेट्रोल में इथेनॉल का मिश्रण महज 1.5% के आसपास था, वहीं सरकार की नीतियों और बायोफ्यूल बुनियादी ढांचे में भारी निवेश के कारण साल 2025 तक यह आंकड़ा लगभग 20% तक पहुंच गया है. अब तक सरकार का फोकस वाहनों में इथेनॉल के उपयोग पर था. लेकिन अब कुकिंग फ्यूल के तौर पर इस्तेमाल का प्लान बनाया जा रहा है.
एलपीजी से बेहतर विकल्प?
बता दें, इथेनॉल एक अल्कोहल-आधारित जैव ईंधन है, जो मुख्य रूप से गन्ने से तैयार किया जाता है.
– गडकरी के मुताबिक यह तकनीक कमर्शियल LPG सिलेंडर की तुलना में काफी सस्ती पड़ेगी, जिससे आम परिवारों और होटल व्यवसायों का मासिक खर्च घटेगा.
– केरोसिन, लकड़ी या कोयले के मुकाबले इथेनॉल पूरी तरह से स्वच्छ जलता है. इससे कार्बन मोनोऑक्साइड और बिना जले हाइड्रोकार्बन का उत्सर्जन न के बराबर होता है, जिससे घर के भीतर की हवा शुद्ध रहती है.
– भारत अपनी कच्चे तेल और एलपीजी की जरूरतों का लगभग 85% हिस्सा विदेशों से आयात करता है. हर साल आयात बिल के रूप में लाखों करोड़ रुपये देश से बाहर जाते हैं. इथेनॉल के इस्तेमाल से इस भारी आर्थिक बोझ को कम किया जा सकता है.
– इथेनॉल का उत्पादन गन्ने और मक्के से होता है, इसलिए इसकी मांग बढ़ने से देश के गन्ना और मक्का उत्पादक किसानों की आय में भारी इजाफा होगा.
– एक्सपर्ट्स का मानना है कि इथेनॉल स्टोव को बड़े पैमाने पर भारतीय घरों में स्थापित करने के लिए सरकार के सामने कई चुनौतियों होंगी. क्योंकि घरों के अंदर इथेनॉल जैसे अत्यधिक ज्वलनशील तरल ईंधन का उपयोग करने के लिए सख्त सुरक्षा मानकों की आवश्यकता होगी ताकि किसी भी दुर्घटना से बचा जा सके.



