
अयोध्या, 25 जून। उत्तर प्रदेश के अयोध्या धाम में राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में लंबी प्रशासनिक उठा-पटक और गहन जांच के बाद गुरुवार को थाना राम जन्मभूमि में आठ रसूखदार लोगों के खिलाफ नामजद केस दर्ज किया गया है. यह हाई-प्रोफाइल मुकदमा राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नवनियुक्त ट्रस्टी कृष्ण मोहन की लिखित तहरीर पर आधिकारिक तौर पर दर्ज किया गया. शासन स्तर से हरी झंडी मिलने के बाद ही स्थानीय पुलिस द्वारा आरोपियों के खिलाफ इतनी बड़ी दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई गई है.
पुलिस और अफसरों के बयानों में विरोधाभास
हालांकि, इस बड़ी कार्रवाई के बावजूद फिलहाल अयोध्या पुलिस मीडिया के सामने सार्वजनिक रूप से केस दर्ज किए जाने की बात से साफ इनकार कर रही है. ज्ञात हो कि ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य कामेश्वर चौपाल के आकस्मिक निधन के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नए सदस्य बने कृष्ण मोहन की तहरीर को इस मुकदमे का मुख्य आधार बनाया गया है. पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार राम शंकर यादव उर्फ टीनू, अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्रा, करुणेश पांडेय, अविनाश शुक्ला, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्रा और सुभाष चंद्र श्रीवास्तव के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है. इन सभी नामजद आरोपियों के विरुद्ध नए कानूनी प्रावधानों के तहत धारा 306, 316, 317 और 61 के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया है.
चार मुख्य आरोपी किए गए गिरफ्तार
दर्ज की गई ये गंभीर धाराएं मुख्य रूप से मंदिर के धन के गबन, धोखाधड़ी और आपराधिक साज़िश रचने से सीधे तौर पर संबंधित हैं. इस मामले में अब तक मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार मुख्य आरोपियों सुभाष श्रीवास्तव, अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला व लवकुश मिश्रा को गिरफ्तार भी कर लिया है. नामजद आरोपियों में अधिकांश लोग मंदिर परिसर के दानपात्रों से निकलने वाले चंदे को गिनने और उसे बैंक में जमा करने की व्यवस्था से सीधे जुड़े थे। इनमें से एक आरोपी टिन्नू सुपरवाइजरी की व्यवस्था में था।
चंपत राय का आरोपियों की लिस्ट में नाम नहीं
एफआईआर में भले ही चंपत राय का नाम नहीं, लेकिन उनके बेहद करीबी और उनके ड्राइवर रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू को पुलिस ने आरोपी बनाकर गिरफ्तार कर लिया है। जांच के मुताबिक टिन्नू 2022 में मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के समय से ही मंदिर के आंतरिक मामलों और व्यवस्थाओं में सक्रिय रूप से दखल रखता था। SIT ने जो शुरुआती रिपोर्ट सौंपी है उसमें चंपत राय, ट्रस्टी डा. अनिल मिश्रा और निर्माण प्रभारी गोपाल राव समेत 14 से 17 लोगों की भूमिका संदिग्ध मानी गयी है। हालांकि कानूनी कार्रवाई अभी निचले स्तर के कर्मचारियों और सेवादारों से शुरू की गयी है।
चंपत राय का वित्तीय जानकारी देने से इनकार
चंपत राय ने इस समय चल रही SIT जांच का हवाला देते हुए ट्रस्ट की आमदनी, खर्च, दान और बैंक खातों से जुड़ी कोई भी वित्तीय जानकारी सार्वजनिक रूप से साझा करने से साफ इनकार कर दिया है। राजनीतिक और धार्मिक में चल रही चर्चाओं के अनुसार इतने गंभीर आरोप और विवाद सामने आने के बाद आने वाले समय में चंपत राय को ट्रस्ट के महासचिव पद से दूर किया जा सकता है या ट्रस्ट का नये सिरे से पुनर्गठन हो सकता है।
भाजपा राज में नाइंसाफ़ी की दिखेगी ये झांकी, फुनगी को फाँसी, शाखाओं को मिलेगी माफ़ी!. उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि प्रदेश की जनता के बीच अब यह पुख्ता धारणा बन रही है कि पहले एसआईटी के बहाने मामले के सारे मुख्य सबूत साफ कर दिए गए होंगे.
अखिलेश यादव, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष
एसआईटी का गठन लीपापोती के लिए किया गया था, लेकिन प्रदेश की राज्यपाल को पूरे प्रदेश के कांग्रेस कार्यकर्ताओं के ज्ञापन दिए जाने और व्यापक पैमाने पर विरोध प्रदर्शन का असर रहा कि सरकार को भगवान राम मंदिर मे बीजेपी और आरएसएस के लोगों की तरफ से की गई चढ़ावा चोरी मे कार्रवाई करनी पड़ी.
अजय राय, उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष



