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बगैर सफाई और पूछताछ के सौंप दी केदारनाथ VIP खर्च की जांच रिपोर्ट, ‘मेहमाननवाजी’ पर उठ रहे सवाल

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देहरादून, 13 जुलाई, 26. केदारनाथ धाम में श्रद्धालुओं के दान से वीआईपी मेहमानों की मेहमाननवाजी और फिजूलखर्ची का मामला इन दिनों उत्तराखंड की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में गरमाया हुआ है। बदरी केदार मंदिर समिति द्वारा दान के पैसों पर वीआईपी आवाभगत के मामले में अब जांच रिपोर्ट ही सवालों के घेरे में आ गई है. ऐसा इसलिए, क्योंकि एक तरफ जांच रिपोर्ट में प्रकरण से जुड़े होटल, रेस्टोरेंट के दस्तावेजों को सत्यापित किए जाने की प्रक्रिया जारी होने की बात कही जा रही है, तो दूसरी तरफ जांच रिपोर्ट में भाजपा नेताओं को सफाई देने तक का मौका नहीं दिया गया. इस तरह आधी अधूरी जांच पर ही मंदिर समिति के तत्कालीन अधिकारियों को प्रथम दृष्टया गलत ठहरा दिया गया.

क्या है केदारनाथ वीआईपी मेहमाननवाजी मामला
यह मामला एक RTI खुलासे के बाद सामने आया है। आरोप लगा था कि श्री बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति BKTC श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाये गये आस्था के पैसे का इस्तेमाल रसूखदार नेताओं, अधिकारियों और वीआईपी मेहमानों के केदारनाथ दौरे के दौरान उनके महंगे होटलों में रुकने, खाने-पीने और मेहमाननवाजी के बिल चुकाने में कर रही है। इन बिलों में भाजपा की प्रदेश सचिव नेहा जोशी और केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल समेत कई वीआईपी के नाम हजारों रुपये के खर्चे दर्ज पाये गये थे।

आंकड़ों में बंदरबांट का आरोप
नेताओं का आरोप है कि मंदिर समिति के भीतर के अधिकारियों ने खुद के किए घपलों और पैसों की बंदरबांट छिटाने के लिए वीआईपी नेताओं के नाम का सहारा लिया और रिकार्ड में हेरफेर कर गलत आंकड़े पेश किये हैं। जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी है, जिसमें वित्तीय अनियमितताओं और नियमों की अनदेखी की पुष्टि हुई है। शासन ने इस रिपोर्ट के आधार पर मंदिर समिति के तीन अधिकारियों/कर्मचारियों के खिलाफ तत्काल प्रभाव से सख्त कार्रवाई के निर्देश जारी कर दिये हैं।

बदरीनाथ और केदारनाथ मंदिर को लेकर यूं तो समय-समय पर तमाम विवाद सामने आते रहे हैं. लेकिन इस बार जिस तरह दान चोरी का प्रकरण सामने आया है, उसके बाद दूसरे तमाम मामलों से भी पर्दा उठने लगा है. हाल ही में केदारनाथ धाम में वीआईपी अतिथियों खासतौर पर भाजपा के नेताओं पर लाखों खर्च करने की बात सामने आई थी. जिस पर मंदिर समिति द्वारा जांच भी की जा चुकी है.

वैसे तो जांच रिपोर्ट में तत्कालीन सीईओ विजय थपलियाल के साथ ही तत्कालीन व्यवस्थापक और मुख्य प्रभारी अधिकारी को भी वित्तीय अनियमितता के लिए प्रथम दृष्टया गलत ठहरा दिया गया है. लेकिन जांच रिपोर्ट खुद यह कहती है कि इसमें अभी जांच के लिए ऐसे कई बिंदु हैं जिस पर जांच अधिकारियों द्वारा जांच ही नहीं की गई. बड़ी बात यह है कि भाजपा के जिन नेताओं पर वीआईपी होने के नाते खर्च किया गया, उनसे भी जांच अधिकारियों द्वारा बयान नहीं लिए गए हैं. खुद केदारनाथ की विधायक आशा नौटियाल इस बात की पुष्टि करती हैं. वह कहती हैं कि,

बदरी केदार मंदिर समिति की तरफ से उन्हें बिल भुगतान को लेकर संपर्क नहीं किया गया और ना ही उनसे इस पर कोई बयान लिए गए. -आशा नौटियाल, केदारनाथ विधायक

हालांकि केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल के सुर बदले हुए दिखाई दिए. जब उनसे पूछा कि, ‘क्या आपके पास आपके द्वारा भुगतान किए गए बिल की कॉपी है? तो उन्होंने कोई भी बिल भुगतान की कॉपी होने से इनकार कर दिया’. इससे पहले केदारनाथ विधायक लगातार खुद के द्वारा ही केदारनाथ में रुकने का भुगतान करने की बात कहती रही हैं. लेकिन अब उन्होंने यह मान लिया है कि खर्च के भुगतान के उनके पास कोई भी दस्तावेज मौजूद नहीं हैं.

खास बात यह है कि कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी की बेटी नेहा जोशी भी जांच रिपोर्ट के अनुसार कोई भी बिल के भुगतान की पर्ची प्रस्तुत नहीं कर पाई. जाहिर है कि ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि भाजपा के इन नेताओं ने भुगतान किया है या फिर इनके द्वारा गलत दावे प्रस्तुत किए जा रहे हैं.

बदरी-केदार में लगातार हो रहे विवाद के बीच भारतीय जनता पार्टी की छवि खराब होने को लेकर भी सवाल किया जा रहे हैं. दरअसल, प्रदेश में भाजपा की सरकार है और ऐसे में बिल भुगतान का यह मामला सरकार के लिए भी सिर दर्द बना हुआ है. बड़ी बात तो यह है कि इस पर जब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा,

भाजपा सरकार में इन चोरियों और ऐसे गलत कामों को रोका जा रहा है. ऐसे में इसे इस रूप में नहीं देखा जाना चाहिए कि इस सरकार में ऐसे विवादित मामले आ रहे हैं. बल्कि ऐसे काम पिछले लंबे समय से हो रहे थे, लेकिन इन्हें पकड़ने की हिम्मत भाजपा सरकार ने दिखाई है. महेंद्र भट्ट प्रदेश अध्यक्ष भाजपा

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