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उत्तराखंड के 19 लाख मतदाताओं को चुनाव आयोग ने जारी किया नोटिस, गलत जवाब पर हो सकती है जेल

देहरादून, 29 जुलाई, 26. उत्तराखंड के 19.04 लाख मतदाताओं को एसआईआर प्रपत्र से सामने आई विसंगति के आधार पर चुनाव आयोग से नोटिस जारी हो गए हैं। नोटिस में गलत जानकारी देने वाले मतदाताओं को जेल के साथ ही जुर्माना भी हो सकता है।चुनाव आयोग ने एसआईआर के तहत उन सभी मतदाताओं को नोटिस जारी किए हैं, जिनके एसआईआर प्रपत्र में नाम, आयु, रिश्तेदार की आयु संबंधी विसंगतियां सामने आईं हैं।

नोटिस में मतदाता का नाम, इपिक नंबर, विधानसभा, भाग संख्या, क्रम संख्या और पता लिखा हुआ है। ये भी बताया गया है कि मतदाताओं को ये नोटिस किस कारण से आया है। साफ किया गया है कि मतदाता ने अपने रिश्तेदार के साथ जो भी जानकारी उपलब्ध कराई है, वह पिछले एसआईआर के मानकों के हिसाब से ठीक नहीं है। नोटिस पर सुनवाई की तिथि, समय और स्थान भी बताया गया है।

गलत जानकारी पर इन कानूनों के तहत कार्रवाई
भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा-217 के तहत कार्रवाई होगी। ये धारा किसी लोक सेवक (सरकारी अधिकारी या पुलिस) को नुकसान पहुंचाने के इरादे से उसे जानबूझकर झूठी या गलत सूचना देने से संबंधित है। यदि कोई व्यक्ति यह जानते हुए कि सूचना झूठी है, किसी सरकारी अधिकारी को ऐसी जानकारी देता है, जिससे वह अधिकारी किसी अन्य व्यक्ति को नुकसान या परेशानी पहुंचाए तो उसे एक साल की कैद, 10 हजार रुपये जुर्माना या दोनों हो सकता है। इसके अलावा लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा-31 के तहत भी कार्रवाई हो सकती है। यह धारा झूठी घोषणाएं करने से संबंधित है, जिसके तहत मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने के लिए लिखित रूप में गलत जानकारी देना एक दंडनीय अपराध है। दोषी पाए जाने पर एक वर्ष तक का कारावास, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

जो दस्तावेज आप देंगे, आयोग कराएगा जांच
सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तू दास ने बताया कि नोटिस की सुनवाई के दौरान दिए गए बयानों के समर्थन में मतदाता जो भी दस्तावेज देंगे, उनकी आयोग स्वतंत्र रूप से जांच कराएगा। मसलन, किसी ने 10वीं का प्रमाणपत्र दिया है तो संबंधित बोर्ड से उसका सत्यापन कराया जाएगा। कोई भी दस्तावेज झूठा, मनगढ़ंत, गलत पाया जाता है तो बीएनएस और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत कार्रवाई हो सकती है।

19 लाख मतदाताओं की जानकारी में पाई गई त्रुटियां
उत्तरकाशी जिले में 2,24,417 मतदाताओं में से 55,976, चमोली में 2,72,187 मतदाताओं में से 52,246 , रुद्रप्रयाग में 1,80,786 मतदाताओं में से 42,469, टिहरी गढ़वाल जिले में 4,63,628 मतदाताओं में से 1,04,402, देहरादून में 11,90,805 मतदाताओं में से 3,95,868, हरिद्वार में 12,46,219 मतदाताओं में से 3,90,312, पौड़ी गढ़वाल में 5,03,468 मतदाताओं में से 1,05,945, पिथौरागढ़ में 3,41,497 मतदाताओं में से 70,065, बागेश्वर में 2,00,919 मतदाताओं में से 40,998, अल्मोड़ा में 4,71,938 मतदाताओं में से 77,566, चम्पावत में 1,88,924 मतदाताओं में से 44,315, नैनीताल में 6,93,325 मतदाताओं में से 1,88,054, उधम सिंह नगर जिले में 11,55,672 मतदाताओं में से 3,36,164 मतदाताओं के फॉर्म में त्रुटि पाई गई.

मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से जारी सूची के अनुसार, देहरादून जिले में मौजूद मतदाताओं में से 33 फीसदी मतदाताओं की ओर से दी गई जानकारियों में विसंगतियां पाई गई हैं. इसी तरह, हरिद्वार में 31 फ़ीसदी, उत्तरकाशी में 25 फ़ीसदी, चमोली 19 फ़ीसदी, रुद्रप्रयाग में 23 फ़ीसदी, टिहरी गढ़वाल में 23 फ़ीसदी, पौड़ी गढ़वाल में 21 फ़ीसदी, पिथौरागढ़ में 21 फ़ीसदी, बागेश्वर में 20 फ़ीसदी, अल्मोड़ा में 16 फ़ीसदी, चंपावत में 23 फ़ीसदी, नैनीताल में 27 फ़ीसदी और उधमसिंह नगर जिले में 29 फ़ीसदी मतदाताओं की ओर से दी गई जानकारियों में विसंगतियां पाई गई हैं.

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