
हरिद्वार, 28 जुलाई, 26. 30 जुलाई से कांवड़ मेले की विधिवत शुरुआत होगी, लेकिन उससे पहले ही बड़ी संख्या में कांवड़िए गंगा जल लेने हरिद्वार पहुंच रहे हैं. भगवान शिव में आस्था रखने वाले कांवड़ियों की भक्ति के अलग-अलग रंग भी देखने को मिल रहे हैं. मेरठ के रहने वाले 53 वर्षीय हरपाल नाथ रामराज घुटनों के बल कांवड़ लेकर हरिद्वार पहुंचे, जिसकी हर तरफ चर्चा की जा रही है.
नेपाल के पशुपतिनाथ और उज्जैन के महाकाल की यात्रा पर निकले हैं हरपाल
मेरठ निवासी हरपाल नाथ हरिद्वार से गंगाजल लेकर नेपाल स्थित पशुपतिनाथ धाम और उज्जैन के महाकाल मंदिर की यात्रा पर निकले हैं। उनकी मनोकामना, नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर में जलाभिषेक के बाद ही पूरी होगी. हालांकि उनकी कोई खास मनोकामना तो नहीं है लेकिन वो भगवान शिव के परम भक्त हैं और उन्हीं को प्रसन्न करने के लिए कठिन कांवड़ यात्रा पर निकले हैं. गंगाजल लेकर वो हरिद्वार से रवाना हो गए हैं.
411 दिन में तय होगी पशुपतिनाथधाम की कठिन यात्रा
दरअसल, सावन का कांवड़ मेला है और इसमें कोई खड़ी कांवड़ लेकर जा रहा है तो कोई लेटी कांवड़ लेकर जा रहा है. कोई मटकों में 251 लीटर जल भरकर जा रहा है. इन सबके बीच एक अनोखी कांवड़ भी हरिद्वार पहुंची, जिसे एक 53 वर्षीय व्यक्ति घुटनों के बल चलकर लेकर जा रहा है. यह व्यक्ति है हरपाल नाथ रामराज जो मेरठ का रहने वाले हैं और ये हरिद्वार से गंगाजल लेकर पशुपतिनाथ मंदिर (नेपाल) तक घुटनों के बल ही गंगाजल लेकर जाएगा. करीब 2400 किलोमीटर की ये यात्रा हरपाल 411 दिन में पूरी करेंगे और यह उनकी तीसरी कांवड़ यात्रा है.
हरिद्वार से सोनभद् की 1800 किमी की यात्रा कर चुके हैं
इससे पहले वह हरिद्वार से सोनभद्र तक की 1800 किलोमीटर की यात्रा भी कर चुके हैं. कांवड़ में हरपाल खुद घुटनों से चल रहे हैं और एक ट्राली अपने पीछे बांध रखी है जिसमें उनका 251 लीटर गंगाजल और अन्य आवश्यक सामान रखा हुआ है.
हरपाल नाथ राम राज का कहना है कि, यह उनकी तीसरी यात्रा है और वह हरिद्वार से गंगाजल लेकर पशुपतिनाथ मंदिर नेपाल तक जाएंगे, जहां भगवान भोलेनाथ का इस गंगाजल से अभिषेक करेंगे. इस दौरान वह मुजफ्फरनगर और उज्जैन होते हुए पशुपति नाथ मंदिर नेपाल तक पहुंचेंगे. मगर इस यात्रा के लिए उन्होंने कोई कामना नहीं की है. उनकी कोई इच्छा नहीं, बस वह भगवान शिव का मां गंगाजल से अभिषेक करने के लिए ऐसी कठिन और अनोखी यात्रा कर रहे हैं.
घुटनों को सुरक्षित रखने और छिलने से बचाने के लिए उन्होंने घुटनों पर विशेष पैडिंग और फार्म बांध रखी है। रास्ताभर अन्य श्रद्धालु और स्थानीय पुलिस प्रशासन उनकी इस अदम्य आस्था और भक्त की सराहना कर रहे हैं।



