
यमकेश्वर, 19 जून। चौबट्टाखाल विधानसभा क्षेत्र की बहुप्रतीक्षित स्यूंसी झील एवं बैराज निर्माण परियोजना को अब मूर्त रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की घोषणा के तहत प्रस्तावित लगभग 123.41 करोड़ रुपये की इस बहुउद्देशीय योजना की ई-टेंडरिंग प्रक्रिया शुरू हो गई है। परियोजना के पूरा होने पर क्षेत्र में सिंचाई, पेयजल, पर्यटन, मत्स्य पालन, जल संरक्षण और आधारभूत सुविधाओं को नई मजबूती मिलेगी।
चौबट्टाखाल इलाके के लिए अब तक सबसे बड़े प्रोजेक्ट
इस पूरी योजना की अनुमानित निवादा लागत लगभग 116.57 करोड़ है (जो प्रशासनिक और अन्य स्वीकृतियों को मिलाकर कुल 123 करोड़ के आसपास का प्रोजेक्ट बैठता है)। यह चौबट्टाखाल इलाके के लिए अब तक का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट है। कैबिनेट मंत्री एवं चौबट्टाखाल विधायक सतपाल महाराज ने बताया कि विकासखंड बीरोंखाल में पूर्वी नयार नदी पर प्रस्तावित स्यूंसी बैराज एवं जलाशय निर्माण योजना क्षेत्रीय जनता की लंबे समय से चली आ रही मांग थी। उन्होंने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को गति देने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना क्षेत्र के समग्र विकास में मील का पत्थर साबित होगी।
पूर्वी नयार नदी पर बनाया जा रहा है यह बैराज
उन्होंने बताया कि स्यूंसी बाजार के निकट बंगार झूला पुल के डाउनस्ट्रीम में बनने वाला बैराज छह मीटर ऊंचा और 60 मीटर चौड़ा होगा। इसमें 10×6.5 मीटर आकार के छह गेट लगाए जाएंगे। बैराज के निर्माण से लगभग 700 मीटर लंबी झील बनेगी, जिससे क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता में वृद्धि होगी और पर्यटन गतिविधियों को नया आयाम मिलेगा। इसका मुख्य निर्माण क्षेत्र पौड़ी गढ़वाल के बीरोंखाल ब्लाक के अंतर्गत आने वाले स्यूंसी क्षेत्र में होगा। इसके साथ ही सकमुंडा गधेरा के पास झील का निर्माण कार्य भी इसमें शामिल है।
परियोजना से बदलेगी चौबट्टाखाल की तस्वीर
नयार नदी पर बैराज और झील बनने से चौबट्टाखाल और बीरोंखाल ब्लाक के दर्जनों गांवों में पेयजल की किल्लत हमेशा के लिए खत्म हो जायेगी और करीब 44 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी तथा 56 गांवों की पेयजल व्यवस्था सुदृढ़ होगी। इसके साथ ही जल संरक्षण, भूजल संवर्धन, मत्स्य पालन, नौकायन और पर्यटन के क्षेत्र में नए अवसर विकसित होंगे, जिससे स्थानीय लोगों की आजीविका और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
पर्यटन को बढ़ावा और रोजगार के अवसर
यह मानव निर्मित झील क्षेत्र में वाटर स्पोर्ट्स और पर्यटन के नये केंद्र के रूप में विकसित की जायेगी, जिससे यह इलाका पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा। पर्यटन बढ़ने से स्थानीय युवाओं के लिए होमस्टे, बोटिंग और स्वरोजगार के नये रास्ते खुलेंगे, जिससे हो रहे पलायन पर भी रोक लगेगी।
सतपाल महाराज ने बताया कि परियोजना की हाइड्रोलिक एवं स्ट्रक्चरल डिजाइन आईआईटी रुड़की द्वारा तैयार की गई है। योजना के तहत दो लेन के पुल और एप्रोच रोड का निर्माण भी किया जाएगा, जिससे बंगार और मंगरौ क्षेत्र के ग्रामीणों की राष्ट्रीय राजमार्ग-309 तक पहुंच आसान होगी तथा शिक्षा, स्वास्थ्य और आपातकालीन सेवाओं तक पहुंच में सुधार आएगा। उन्होंने कहा कि 12341.56 लाख रुपये लागत की इस परियोजना को प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति के लिए शासन को भेजा गया है। स्वीकृति प्रक्रिया जारी है, जबकि निर्माण कार्य में विलंब न हो इसके लिए समानांतर रूप से ई-टेंडरिंग प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
कैबिनेट मंत्री ने विश्वास जताया कि स्यूंसी झील एवं बैराज परियोजना चौबट्टाखाल क्षेत्र में विकास, रोजगार और पर्यटन की नई संभावनाओं के द्वार खोलेगी तथा क्षेत्र को नई पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाएगी।



