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राम मंदिर दान चोरी के बाद अब CCTV के सख्त पहरे में होगी गिनती, कैमरों को ब्लाक कर चुराये जा रहे थे पैसे

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अयोध्या, 1 जुलाई 26 अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर उठे विवाद के बाद मंदिर प्रशासन ने पूरे सिस्टम में बड़े बदलाव कर दिए हैं. अब दान की गिनती पहले जैसी नहीं होगी. काउंटिंग रूम में क्या हो रहा है, कौन अंदर जा रहा है और कौन बाहर निकल रहा है… हर चीज पर कैमरे की नजर रहेगी.

CCTV कैमरों की देखभाल के लिए 12 अतिरिक्त कर्मचारी तैनात
यानी, जिस घटना ने सवाल खड़े किए, उसके बाद अब सुरक्षा और निगरानी दोनों बढ़ा दी गई हैं. नई व्यवस्था के तहत हर एक नोट और आभूषण की गिनती पूरी तरह हाई डेफिनेशन CCTV कैमरों की निगरानी में होगी. सिर्फ कैमरे लगाना ही नहीं, बल्कि उन कैमरों की लाइव मॉनिटरिंग के लिए 12 अतिरिक्त कर्मचारियों की भी तैनाती की गई है. उनकी जिम्मेदारी होगी कि काउंटिंग के दौरान होने वाली हर गतिविधि पर लगातार नजर रखें. पैसे गिनने वाले स्टाफ के लिए पाकेटलेस कपड़े पहनना पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है।

काउंटिंग रूम में जाने से पहले हर कर्मचारी की होगी तलाशी
काउंटिंग रूम में आने-जाने वाले हर कर्मचारी की कई स्तर पर मेटल डिटेक्टर से तलाशी ली जाएगी. किसी के अंदर जाने से पहले और बाहर निकलने के बाद जांच होगी. इसके अलावा कर्मचारियों के लिए ड्रेस कोड भी लागू कर दिया गया है, ताकि पूरी प्रक्रिया ज्यादा व्यवस्थित और पारदर्शी बनाई जा सके. SIT ने सिफारिश की है कि गिनती के दौरान बैंक के मुख्य अधिकारियों, प्रशासनिक अधिकारियों और विशेष पुलिस बल या पेशेवर सुरक्षा एजेंसी की मौजूदगी अनिवार्य की जाये।

मंदिर प्रशासन से जुड़े गोपाल राव का नाम काफी चर्चा में, जांच जारी
जिस चढ़ावा मामले के बाद ये बदलाव किए गए, उसकी जांच अभी भी जारी है. इसी बीच मंदिर प्रशासन से जुड़े गोपाल राव का नाम चर्चा में है. सवाल है कि विवाद सामने आने के बावजूद वह अब भी मंदिर के इंचार्ज क्यों बने हुए हैं. ट्रस्ट सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा और महासचिव चंपत राय के बाद इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा गोपाल राव को लेकर हो रही है.

उधर, पुलिस भी जांच की रफ्तार बढ़ा चुकी है. सूत्रों के मुताबिक, अब तक 12 कर्मचारियों से घंटों पूछताछ की जा चुकी है. उनसे पूछा गया कि अगर काउंटिंग प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी हुई तो इसकी भनक उन्हें पहले क्यों नहीं लगी. इसके अलावा पुलिस अब तक इस मामले में 26 लोगों के बयान दर्ज कर चुकी है. फिलहाल जांच एजेंसियां काउंटिंग प्रक्रिया से जुड़े हर पहलू की पड़ताल कर रही हैं. यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि कथित गड़बड़ी कैसे हुई, जिम्मेदार कौन था और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए और क्या कदम उठाने होंगे. यानी, चढ़ावे से जुड़े विवाद के बाद राम मंदिर में सिर्फ जांच ही नहीं चल रही, बल्कि पूरे काउंटिंग सिस्टम की ‘री-डिजाइनिंग’ भी शुरू हो चुकी है.

आरोपियों ने पुलिस को बताया- कैसे कैमरे को देते थे चकमा
सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस को बताया कि चोरी को अंजाम देने के लिए पहले से पूरी प्लानिंग की जाती थी. उन्हें मंदिर परिसर में लगे CCTV कैमरों की लोकेशन की जानकारी थी. इसी का फायदा उठाते हुए एक व्यक्ति दान की रकम निकालता था, जबकि बाकी लोग उसे चारों तरफ से घेर लेते थे, ताकि कैमरों में संदिग्ध गतिविधि नजर न आए. इसके बाद कथित तौर पर रकम को पहले बाथरूम में छिपाया जाता था और मौका मिलने पर मंदिर परिसर से बाहर निकाल लिया जाता था.

आरोपियों ने यह भी पूछताछ में कहा कि ट्रस्ट से जुड़े कुछ प्रभावशाली लोगों के करीबी होने के कारण उनकी नियमित जांच या तलाशी नहीं होती थी. वहीं, कंट्रोल रूम में CCTV की निगरानी करने वाले कर्मचारी भी कथित तौर पर सिर्फ औपचारिकता निभाते थे. आरोपियों का कहना है कि इसी वजह से उन्हें लंबे समय तक पकड़े जाने का डर नहीं था. हालांकि, इस मामले की जांच अभी जारी है.

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