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राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर टिन्नू के भाई का आरोप, ‘चंपत राय और अनिल मिश्रा ने फंसाया’

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अयोध्या, 2 जुलाई, 26 अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले में आरोपी राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव के भाई दिनेश यादव ने पहली बार मीडिया के सामने बयान दिया. दिनेश ने चंपत राय और अनिल मिश्रा पर अपने भाई को फंसाने का सीधा आरोप लगाया है. दिनेश ने टिन्नू को पूरी तरह निर्दोष बताते हुए कहा कि बड़े पदाधिकारी खुद को बचाने के लिए उसे मोहरा बना रहे हैं.

राम मंदिर के पिछले 5 वर्षों के आडिट का दोबारा होगा आडिट
दूसरी तरफ, एसआईटी ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए ट्रस्ट के पिछले 5 वर्षों के ऑडिट के दोबारा ऑडिट का फैसला किया है. शासन ने एसआईटी को रिपोर्ट सौंपने के लिए 15 जुलाई तक का अतिरिक्त समय दिया है. पुलिस ने आरोपी अविनाश, लवकुश और करुणेश के ठिकानों से नकदी, जेवर व संदिग्ध संदूक बरामद किया है.

टिन्नू यादव के भाई दिनेश यादव ने खोला मोर्चा
टिन्नू यादव के भाई दिनेश यादव ने कहा कि उनका भाई पिछले 20 सालों से चंपत राय के साथ काम कर रहा था. टिन्नू का स्वभाव बहुत अच्छा है और उस पर कोई मुकदमा नहीं है. दिनेश ने आरोप लगाया कि चंपत राय और अनिल मिश्रा ने मामले से पल्ला झाड़ लिया है. बड़े लोग खुद बचने के लिए टिन्नू को फंसा रहे हैं क्योंकि दान पेटी की एक चाबी टिन्नू और दूसरी बैंक कर्मियों के पास होती थी. दिनेश के मुताबिक, 18 से 20 लाख का अपराधी सिर्फ एक लाख रुपये के लिए ऐसा नहीं करेगा.

ट्रस्ट के दफ्तर प्रभारी का दावा
इधर, राम मंदिर ट्रस्ट के कार्यालय प्रभारी प्रकाश गुप्ता ने इस चोरी के लिए सीधे तौर पर बैंक को जिम्मेदार ठहराया है. प्रकाश गुप्ता ने बताया कि बैंक के साथ एग्रीमेंट हुआ था, जिसके तहत दानपेटी से पैसा निकालने और उसे गिनकर जमा करने की जिम्मेदारी बैंक की थी. बैंक ने बिना वेरिफिकेशन के सिफारिश पर लोग रख लिए. उन्होंने चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को पूरी तरह ईमानदार बताते हुए कहा कि उनकी ईमानदारी पर सवाल उठाना सूरज को दीया दिखाने जैसा है.

एसआईटी की रडार पर बड़े अफसर
इस महाघोटाले की जांच कर रही एसआईटी के रडार पर अब ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारी भी आ गए हैं. पूछताछ के दौरान अनिल मिश्रा ने पूरी जिम्मेदारी टिन्नू यादव पर डालते हुए खुद को बेगुनाह बताया है, हालांकि उन्होंने निगरानी के स्तर पर चूक होने की बात स्वीकार की है. एसआईटी अब ट्रस्ट के निर्माण कार्यों, वित्तीय लेन-देन, भुगतान प्रक्रिया और दान में मिले जेवरात के रिकॉर्ड की गहन पड़ताल कर रही है ताकि गड़बड़ी की असल कड़ियों को जोड़ा जा सके.

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