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उत्तराखंड में ‘पहाड़’ जैसा संकट, रेफर-रेफर के खेल और पौड़ी में बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था की भेंट चढ़ी एक और गर्भवती

केएस रावत. पौड़ी जिले के दूरस्थ नैनीडांडा विकासखंड की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था ने एक गर्भवती की जान ले ली। क्षेत्र में अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं होने के कारण स्वजन उसे करीब 110 किलोमीटर दूर काशीपुर ले गए। वहां जांच में गर्भस्थ शिशु की मौत की पुष्टि हुई।

चमचमाते विज्ञापनों के बीच पहाड़ों में बुनियादी इलाज को तरसती गर्भवती महिलाएं
आपरेशन के जरिये मृत शिशु का प्रसव कराया गया, लेकिन प्रसव के बाद महिला की हालत बिगड़ गई। उसे हल्द्वानी रेफर किया गया, जहां उपचार के दौरान शुक्रवार को उसकी मौत हो गई।

डेढ़ साल पहले हुई थी शादी
ग्राम कलखोबिया (किनगोड़ीखाल) निवासी विनीता उर्फ अनीता का विवाह करीब डेढ़ वर्ष पूर्व ग्राम बडेरी-नलाई निवासी कुलदीप सिंह से हुआ था। वह आठ माह की गर्भवती थी और उसका उपचार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नैनीडांडा में चल रहा था। तीन दिन पहले अचानक तेज पेट दर्द और उल्टियां होने पर चिकित्सकों ने अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी।

अल्ट्रासाउंड सुविधा न होने से 110 किमी दूर ले जाना पड़ा
विकासखंड में यह सुविधा उपलब्ध न होने के कारण परिजन उसे काशीपुर ले गए, जहां जांच में पता चला कि गर्भस्थ शिशु की धड़कन बंद हो चुकी है। इसके बाद मृत शिशु का प्रसव कराया गया। प्रसव के बाद भी विनीता की हालत में सुधार नहीं हुआ, जिसके चलते उसे हल्द्वानी रेफर किया गया। वहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना से परिवार में शोक का माहौल है।

बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था ने खोली सरकार की पोल
स्वजनों के अनुसार, करीब एक माह पहले रामनगर में कराई गई जांच में मां और गर्भस्थ शिशु दोनों स्वस्थ बताए गए थे। इसके बाद वह कुछ समय मायके में रही और हाल ही में ससुराल लौटी थी। यह घटना एक बार फिर पर्वतीय क्षेत्रों की स्वास्थ्य सुविधाओं पर सवाल खड़े करती है। नैनीडांडा विकासखंड के किसी भी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में अल्ट्रासाउंड की सुविधा उपलब्ध नहीं है, जबकि गर्भवती महिलाओं के लिए यह एक आवश्यक जांच है।

अधूरी सुविधाओं के अभाव में उजड़ती गोद
ग्राम बडेरी-नलाई तक मोटर मार्ग नहीं पहुंचा है। गांव पहुंचने के लिए नलाई मल्ली से करीब एक किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। स्वजनों ने बताया कि गंभीर हालत में विनीता को किसी तरह पैदल सड़क तक लाया गया, जिसके बाद वाहन से काशीपुर ले जाया गया।

ग्रामीणों का कहना है कि नलाई मल्ली-अदालीखाल मार्ग लंबे समय से जर्जर है और कई वर्षों से डामरीकरण नहीं हुआ है। साथ ही सड़क को बडेरी-नलाई तक विस्तारित करने की मांग भी लंबे समय से लंबित है।

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