‘मैं कलंक लेकर अयोध्या से नहीं जाऊंगा, जिन्होंने आरोप लगवाये हैं वही हटवायेंगे’, चंपत राय का कड़ा रुख

अयोध्या, 8 जुलाई, 26. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने मंदिर परिसर या अयोध्या छोड़ने से साफ इनकार कर दिया है. उनके करीबियों का कहना है कि वह हार मानने वालों में नहीं है, साथ ही वह यह कलंक लेकर अयोध्या से नहीं जाएंगे. वहीं एसआईटी की जांच पूरी होने के बाद हर बात का जवाब देंगे. बताते चले कि ट्रस्ट के अनुसार चंपत राय ने नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दिया है. वह विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय उपाध्यक्ष पद पर बने हुए हैं.
मुझे किस बात की चिंता है। जिन्होंने आरोप लगवाये हैं, वही इन्हें हटवाएंगे। मैं यह कलंक लेकर अयोध्या से नहीं जाऊंगा। मैंने अपना पूरा जीवन राम मंदिर आंदोलन और इसके निर्माण के लिए समर्पित कर दिया है, इसलिए राम मंदिर या अयोध्या से नाता तोड़ने का सवाल ही नहीं उठता।
चंपत राय, पूर्व महासचिव, राम मंदिर ट्रस्ट, अयोध्या
मंदिर व्यवस्था को लेकर बंद कमरे में हुई बैठक
उनके करीबियों द्वारा बताया जा रहा है कि वह अयोध्या व राम मंदिर से नाता नहीं तोड़ेंगे. उन्होंने अपना पूरा जीवन राम मंदिर के लिए अर्पित कर दिया. यह कलंक लेकर वह अयोध्या से नहीं जा सकते हैं. फिलहाल वह एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं. संभावना है रिपोर्ट मिलने के बाद वह अपना पक्ष मीडिया के समक्ष रख सकते हैं. इस बीच कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि उनसे मिलने के लिए ट्रस्ट भवन पहुंचे.
ट्रस्ट पदाधिकारियों ने शेयर किए अनुभव, गोपाल राव ने दी सफाई
करीब आधे घंटे तक उनसे वार्ता की, सूत्र बताते हैं कि इस दौरान मंदिर की व्यवस्था संचालन को लेकर चर्चा हुई. मंगलवार को अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने भी चंपत राय के साथ बंद कमरे में करीब एक घंटे वार्ता की थी. दोनों पदाधिकारियों ने मंदिर की दैनिक व्यवस्था, सुरक्षा, चढ़ावे प्रबंधन और ट्रस्ट की पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर सलाह ली. बताया जा रहा है कि चंपत राय ने भी अपने अनुभवों को उनसे साझा किया व समस्त व्यवस्थाओं के बारे में संक्षेप में जानकारी दी. उन्होंने भविष्य में होने वाले कार्यों की भी पूरी जानकारी दोनों पदाधिकारियों के समक्ष रखी.
खातों के संचालन की नई जिम्मेदारी, बैंक को दी गई सूचना
बताया जा रहा है कि दोनों पदाधिकारियों ने राम मंदिर निर्माण में उनके योगदान की प्रशंसा की व आगे भी व्यवस्थाओं से संबंधित सलाह लेने की बात कही. वहीं गोपाल राव भी कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी से मिलने वैदेही भवन पहुंचे. वापस लौटने पर पहले पत्रकारों के सवाल का जवाब देने से बचते रहे. लेकिन उन्होंने इतना जरूर कहा कि वह अभी भी ट्रस्टी हैं. उन्हें हटाया नहीं गया है, हटाने की खबरें गलत संदेश हैं.
कृष्ण मोहन और सीए चंदन राय को मिली ट्रस्ट के खातों की जिम्मेदारी
बीते सोमवार को ट्रस्ट की बैठक के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से जारी किए गए प्रेस विज्ञप्ति में लिखा गया था कि गोपाल नगरकोटे (गोपाल राव) को विशिष्ट आमंत्रित सदस्य की सूची से हटा दिया गया है. चंपत राय व अनिल मिश्र के इस्तीफे के बाद ट्रस्ट ने पहला बड़ा फैसला किया है. राम मंदिर से संबंधित खातों के संचालन की जिम्मेदारी नव नियुक्त अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन समेत सीए चंदन राय व राम मंदिर के मुख्य इंजीनियर जगदीश आफले को सौंपी गई. बताया जा रहा है कि यह निर्णय ट्रस्ट के सभी पदाधिकारियों की सर्व सम्मति से किया गया.
कारसेवकपुरम और कार्यशाला तक पहुंची पुलिस
इसकी सूचना संबंधित बैंक अधिकारियों को दे दी गई है. संभावना है कि गुरुवार को इस संबंध में लिखित औपचारिकता पूरी की जाएगी. पुलिस जांच की आंच अब कारसेवकपुरम व मंदिर कार्यशाला तक भी पहुंच गई है. सूत्रों के अनुसार पुलिस की एक टीम जल्द ही यहां जाकर जांच पड़ताल करेगी. जानकारी के अनुसार राम मंदिर निर्माण से पूर्व से अब तक अयोध्या आने वाले श्रद्धालु रामघाट स्थित मंदिर कार्यशाला अवश्य जाते हैं, यहां पर कई दानपात्र भी रखे गए हैं.
राम मंदिर दानपात्र विवाद के बाद बदलाव
इसमें भी प्रतिमाह चढ़ावा एकत्र होता है. दूसरी ओर कारसेवकपुरम में भी दानपात्र व ऑनलाइन समेत अन्य कई माध्यमों से दान आता है. माना जा रहा है कि दान की यह रकम भी मंदिर निर्माण के नाम पर आती है. जबकि इसका कोई रिकॉर्ड पुलिस व एसआईटी को अब तक नहीं मिला है. बताया जाता है कि कारसेवकपुरम में ट्रस्ट के एक पूर्व पदाधिकारी का करीबी इन दोनों जगह पर मिले दान की व्यवस्था संभालता है.



