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‘पेड़ लगाओ-जीवन बचाओ’, बिथ्याणी डिग्री कालेज में वृक्षारोपण औ सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ ‘हरेला’ की धूम

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​बिथ्याणी, 15 जुलाई 26. उत्तराखंड की समृद्ध लोक-संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण के प्रतीक ‘हरेला पर्व’ का महायोगी गुरुगोरखनाथ राजकीय महाविद्यालय, बिथ्याणी में भव्य आयोजन किया गया। प्रकृति का सम्मान, जीवन का अभियान के मूल मंत्र के साथ आयोजित इस उत्सव में न केवल छात्र-छात्राओं, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों और युवाओं ने भी बढ़-चढ़कर भागीदारी की।

लोक संस्कृति और पर्यावरण के संगम ‘हरेला’ का भव्य उत्सव


​महाविद्यालय के प्राचार्य ने कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए कहा कि हरेला केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ हमारे अटूट जुड़ाव का उत्सव है। उन्होंने क्षेत्रवासियों से अपील की कि वे अपने पहाड़ों को हरा-भरा रखने के लिए ‘पेड़ लगाओ – जीवन बचाओ’ के संकल्प को जीवन का हिस्सा बनाएं। महाविद्यालय प्रशासन ने क्षेत्रवासियों से अपील की है कि आइए हरेला पर्व के शुभ अवसर पर प्रकृति संरक्षण, वृक्षारोपण और पर्यावरण जागरुकता का संकल्प लें। हम सब मिलकर संकल्प लें कि अपने पहाड़, अपनी धरती को हरा-भरा बनायें और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक शुद्ध पर्यावरण की नींव रखें।

​उत्सव के प्रमुख आकर्षण:
​सघन वृक्षारोपण: महाविद्यालय परिसर और आसपास के क्षेत्रों में औषधीय, फलदार और छायादार पौधों का रोपण किया गया। छात्रों ने पौधों के संरक्षण की जिम्मेदारी लेते हुए पर्यावरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई।

​पारंपरिक हरेला पूजन: पूर्ण विधि-विधान के साथ हरेला पूजा संपन्न हुई। उपस्थित बड़े-बुजुर्गों ने युवा पीढ़ी को हरेला प्रदान कर उनके सुखद और दीर्घायु जीवन की कामना की।

​पर्यावरण विमर्श: ग्लोबल वार्मिंग और वनाग्नि जैसे ज्वलंत मुद्दों पर एक विशेष परिचर्चा आयोजित की गई। इसमें शिक्षकों और विशेषज्ञों ने आधुनिक विकास के साथ पारंपरिक ज्ञान के संतुलन पर जोर दिया।

​सांस्कृतिक छटा: कार्यक्रम के समापन पर विद्यार्थियों ने कुमाऊंनी और गढ़वाली संस्कृति पर आधारित लोकगीत, थड़िया और झुमेलो की शानदार प्रस्तुतियां दीं, जिससे पूरा परिसर लोक-संस्कृति के रंग में रंग गया।

​जनभागीदारी की नई मिसाल
​इस आयोजन में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, महिला मंगल दलों और युवक मंगल दलों ने सक्रिय सहयोग दिया। ग्रामीणों का मानना है कि महाविद्यालय द्वारा शिक्षा के साथ-साथ सांस्कृतिक चेतना को बढ़ावा देने का यह प्रयास सराहनीय है। यह आयोजन न केवल युवाओं को उनकी जड़ों से जोड़ रहा है, बल्कि भावी पीढ़ी में पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता भी पैदा कर रहा है।

​महाविद्यालय प्रशासन ने इस सफल आयोजन के लिए समस्त क्षेत्रवासियों का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे लोक-हितकारी अभियानों को जारी रखने का संकल्प दोहराया।

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