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सनातन संस्कृति के संवाहक स्वामी चिदानंद सरस्वती को मिला ‘आदि सनातन धर्म रत्न सम्मान’

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ऋषिकेश, 15 जुलाई, 26. विश्व युवा कौशल दिवस के अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष एवं परमार्थ पीठाधीश्वर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज को भारतीय संस्कृति, योग, पर्यावरण संरक्षण तथा नदियों के संरक्षण में पांच दशकों से अधिक समय से किए जा रहे उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रतिष्ठित “आदि सनातन धर्म रत्न” सम्मान से सम्मानित किया गया।

धर्म, पर्यावरण और मानवता की सेवा का सम्मान
यह सम्मान उन्हें भारतीय संस्कृति, संस्कार, योग, पर्यावरण संरक्षण, गंगा सहित विभिन्न नदियों के तटों पर वृक्षारोपण तथा गंगा आरती और अन्य नदी आरतियों की परंपरा के माध्यम से जनजागरण का व्यापक अभियान चलाने के लिए प्रदान किया गया। विश्व युवा कौशल दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि आज का युग केवल डिग्रियों का नहीं, बल्कि कौशल, संस्कार, संवेदनशीलता और सतत सीखने की क्षमता का है। उन्होंने कहा कि भारत विश्व का सबसे युवा राष्ट्र है और युवाओं के हाथों में कौशल, हृदय में करुणा, जीवन में अनुशासन तथा विचारों में सकारात्मकता होगी, तभी विकसित भारत का सपना साकार होगा।

कार्यक्रम में आए संतों ने युवाओं को किया प्रेरित
कार्यक्रम में ब्रह्मऋषि श्री कुमार स्वामी, महंत भूपेंद्र गिरि जी, निरंजनी अखाड़ा के श्री निरंजन स्वामी जी, नेपाल से पधारे स्वामी आनंद अरुण सहित अनेक संतों ने भी युवाओं को प्रेरित किया। संतों ने गंगा संरक्षण को सबसे बड़ा कौशल, कर्तव्य और संस्कार बताते हुए सभी से नदियों को स्वच्छ, निर्मल और अविरल बनाए रखने का आह्वान किया।

कौशल के साथ संस्कार ही युवा शक्ति की पहचान
स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि परमार्थ निकेतन के गुरुकुलों में संस्कृत और आधुनिक शिक्षा के साथ कंप्यूटर, अंग्रेजी, संगीत, फोटोग्राफी, योग, ध्यान, पर्यावरण संरक्षण और नेतृत्व जैसे विषयों का प्रशिक्षण देकर युवाओं का समग्र विकास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज के युवाओं को केवल सफल पेशेवर ही नहीं, बल्कि संवेदनशील नागरिक भी बनना होगा। तकनीक का उपयोग मानवता की सेवा, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक उत्थान के लिए होना चाहिए। साथ ही उन्होंने पौधारोपण, जल संरक्षण, प्लास्टिक के कम उपयोग और टिकाऊ जीवनशैली अपनाने को आज के समय का महत्वपूर्ण जीवन कौशल बताया।

स्वामी जी ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि अपने कौशल को केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित न रखें, बल्कि उसे समाज, राष्ट्र और विश्व कल्याण का माध्यम बनाएं। उन्होंने कहा कि “युवा केवल कल के नेता नहीं, बल्कि आज के परिवर्तनकर्ता हैं।”

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