
देहरादून, 6 अक्टूबर, 26. देहरादून के परेड ग्राउंड में राज्य के विभिन्न विभागों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों ने अपनी 3 मुख्य मांगों को लेकर संयुक्त मोर्चा आउटसोर्स कर्मचारी संघ उत्तराखंड ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। संघ ने उत्तराखंड के विभिन्न विभागों, निगमों, बैंकों, उपक्रमों, बोर्डों, परिषदों, स्कूलों और अन्य सरकारी संस्थाओं में आउटसोर्स के माध्यम से काम कर रहे कर्मचारियों की तीन मुख्य मांगों को लेकर मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव तथा समस्त मंत्रियों व विधायकों को दिनांक 6 अक्टूबर 2026 का ज्ञापन सौंपा है। कर्मचारियों का कहना था कि वे वर्षों से सरकारी विभागों में अपनी सेवायें दे रहे हैं, लेकिन लगातार उनका शोषण किया जा रहा है।
कर्मचारियों ने अपनी तीन मांगे रखीं
स्थाई कर्मचारियों की तरह ही समान कार्य करने वाले आउटसोर्स कर्मचारियों को भी वही वेतन और भत्ते प्रदान जाएं। उपनल या अन्य संविदा की तर्ज पर आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए भी एक स्पष्ट सेवा सुरक्षा और नियमितीकरण नीति बनाई जाये ताकि उन्हें मनमाने ढंग से हाया न जा सके। उनकी तीसरी मांग है कि ठेकेदारों/प्राइवेट एजेंसियों के जरिये शोषण को खत्म कर कर्मचारियों का सीधे विभाग/राज्य सरकार के स्तर पर समायोजन किया जाये और EPF, ESI/स्वास्थ्य बीमा जैसी बुनियादी सुविधाएं समयबद्ध रूप से सुनिश्चित हों।
ज्ञापन में कहा गया है कि ये मांगें नियमानुसार और संविधान के दायरे में हैं। संघ का तर्क है कि आउटसोर्स कर्मचारियों का कार्य भी उपनल कर्मचारियों जैसा ही है, इसलिए उन्हें भी समान कार्य का समान वेतन और नियमितीकरण का अधिकार मिलना चाहिए। ज्ञापन में आरोप है कि राज्य में दोहरी नीति अपनाई जा रही है, जिससे आउटसोर्स कर्मचारी अपने अधिकारों से वंचित हो रहे हैं।
संघ ने इन मांगों को पूरी तरह संवैधानिक, न्यायसंगत और नियमों के अनुकूल बताया है। ज्ञापन में पूर्व पत्रों का भी हवाला दिया गया है-पत्र संख्या 04 दिनांक 13 जुलाई 2026, पत्र दिनांक 7 अगस्त 2026 तथा पत्र संख्या 46 दिनांक 7 सितंबर 2026। कहा गया है कि पहले भी ये मांगें सरकार के समक्ष रखी जा चुकी हैं, पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई।
संघ ने अनुरोध किया है कि प्रदेश की समस्त सरकारी संस्थाओं में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों के साथ उपनल कर्मचारियों जैसा न्याय करते हुए तीनों मांगें शीघ्र पूरी की जाएं। ज्ञापन में कहा गया है कि मांगें पूरी होने पर कर्मचारी सरकार के आभारी रहेंगे। धरना अनिश्चितकाल के लिए जारी है। प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया है कि वे जब तक सरकार की तरफ से उनकी मांगों पर कोई ठोस लिखित आश्वासन नहीं मिल जाता, तब तक यह धरना जारी रहेगा। हालांकि प्रदर्शन के दौरान सरकारी प्रतिनिधियों ने धरनास्थल पहुंचकर आंदोलनकारियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन कर्मचारी अपनी तीनों मांगों पर अड़े रहे। इस धरने में स्वास्थ्य, शिक्षा, निकाय आदि विभागों से जुड़े आउटसोर्स कर्मचारी हिस्सा ले रहे हैं।



