
ऋषिकेश, 29 अक्टूबर, 26. लंबी जद्दोजहद के बाद आखिरकार टिहरी और देहरादून जनपद की सीमा को जोड़ने वाले आस्था पथ और चंद्रभागा नदी पर पुल निर्माण का सपना जल्द पूरा होने जा रहा है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद एक माह के भीतर निर्माण शुरू होने की उम्मीद है। तीर्थनगरी में गंगा किनारे आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मायाकुंड और चंद्रेश्वर नगर के आस्थापथ को चंद्रभागा नदी पर आर्चब्रिज बनाकर जोड़ा जाएगा। परियोजना पर करीब 32 करोड़ रुपये के बजट की स्वीकृति मिली है। इसमें लगभग 27 करोड़ रुपये पुल निर्माण पर खर्च किए जाएंगे जबकि शेष धनराशि पांच वर्ष तक रखरखाव के लिए सुरक्षित रखी जाएगी।
उत्तराखंड इंवेसमेंट एडं इंफ्रास्टक्चर डेवलपमेंट बोर्ड (यूआइआइडीबी) ने उत्तराखंड प्रोजेक्ट डेवलपमेंट एंड कंसट्रक्शन कोरपोरेशन लिमिटेड (यूपीडीसीसीएल) को इसकी कार्यदायी संस्था नियुक्त किया है। कार्यदायी संस्था के प्रोजेक्ट मैनेजर संजीव कुमार ने बताया कि चंद्रभागा पुल पर करीब 32 करोड़ की लागत से 75-75 मीटर के दो स्पैन वाला लगभग 150 मीटर लंबा बो-स्ट्रिंग पुल बनाया जाएगा।
इसके लिए UIIDB से 32 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति मिली
यूआइआइडीबी की ओर से इसकी वित्तीय स्वीकृति मिल चुकी है और एक महीने के अंदर निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। गौरतलब है कि चंद्रभागा नदी त्रिवेणी घाट और मुनिकीरेती के पूर्णानंद आस्था पथ के बीच बहती है, जिसके कारण देहरादून और टिहरी जनपद के गंगा तटों के किनारे बने आस्था पथ एक-दूसरे से कटे हुए हैं।
इन्हें आपस में जोड़ने की मांग स्थानीय लोग लंबे समय से कर रहे थे। इसके निर्माण के लिए सिंचाई विभाग की ओर से कई बार डीपीआर तैयार कर शासन को प्रस्ताव भेजे गए थे, लेकिन कोई सकारात्मक पहल नहीं हो रही थी। कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल भी कई बार इसकी घोषणा कर चुके हैं। 2022 में श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय के पं. ललित मोहन शर्मा परिसर में आयोजित कार्यक्रम में तत्कालीन शहरी विकास मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को दिए गए मांगपत्र में इसे शामिल किया था, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने दोनों आस्था पथों को जोड़ने के लिए पुल की घोषणा की थी। मुख्यमंत्री की घोषणा के करीब चार साल बाद अब लोगों में पुल निर्माण को लेकर उम्मीद जगी है।
आर्चब्रिज बनने के बाद देहरादून और टिहरी जनपद के आस्थापथ आपस में जुड़ जाएंगे। इससे पर्यटक और श्रद्धालु गंगा किनारे करीब 10 किमी लंबे पैदल मार्ग का निर्बाध आनंद ले सकेंगे। परियोजना पूरी होने पर ऋषिकेश और मुनिकीरेती के बीच पैदल आवागमन सुगम होने के साथ ही धार्मिक व आध्यात्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।



