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विकासनगर में अनोखा विवाह, एक ही मंडप पर 5 भाइयों की शादी, बारात लेकर दूल्हों के घर पहुंचीं दुल्हनें

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विकासनगर, 30 अप्रैल। उत्तराखंड में विवाह की एक से बढ़कर एक परंपराएं हैं. यहां विवाह के बाद दूल्हा-दुल्हन पौधरोपण करते हैं तो वृक्षों को रक्षा सूत्र बांधकर उसकी सुरक्षा का वचन भी देते हैं. उत्तराखंड की दहेज रहित शादियां भी काफी मशहूर हैं. देहरादून जिले के जौनसार बावर में भी विवाह की एक अनूठी परंपरा है. यहां दुल्हनें बारात लेकर दूल्हों के घर पहुंचती हैं। और सबसे खास बात यह है कि इस शादी में फेरे भी नहीं होते। जौनसार बावर में इस अनोखे विवाह को जोजोड़ा नाम ले जाना जाता है।

जौनसार बावर में संयुक्त परिवार को बढ़ावा देने और विवाह में फिजूलखर्ची रोकने के लिए सामूहिक विवाह की अनूठी परंपरा है. इसके तहत एक ही परिवार के विवाह योग्य कई भाइयों की शादियां एक साथ होती हैं. जब कई दुल्हनें एक साथ बारात लेकर अपने ससुराल पहुंचती हैं, तो वो दृश्य अविस्मरणीय होता है. ऐसा ही नजारा जौनसार के खारसी गांव में दिखा. यहां एक ही परिवार में पांच दुल्हनों की बारात पहुंची. इस दौरान दूल्हा पक्ष के घर से एक बेटी अपने ससुराल बारात लेकर विदा हुई.

जौनसार बावर में अनोखा सामूहिक विवाह
उत्तराखंड के जिला देहरादून स्थित जौनसार बावर जनजातीय क्षेत्र अपनी समृद्ध पंरपराओं और सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए है. इन दिनों जहां शादी विवाह जैसे आयोजनों में लोग बहुत अधिक खर्च कर रहे हैं, ऐसे में जौनसार बावर के एक गांव ने मिसाल कायम की है. खारसी गांव निवासी परिवार के मुखिया दौलत सिंह चौहान के घर में 29 अप्रैल के दिन खुशियों का माहौल देखने को मिला.

बारात लेकर दूल्हों के घर पहुंची पांच दुल्हनें
दौलत सिंह के पुत्र नरेंद्र सिंह, मोहन सिंह के पुत्र प्रीतम सिंह, अमित सिंह, प्रदीप सिंह और स्वर्गीय बारू सिंह के पुत्र राहुल सिंह और बेटी राधिका (प्रियंका) की शादी (जोजोड़ा) (Jojoda) की रस्म निभाई गई. इसमें एक साथ पांच दुल्हनें बारात लेकर अपने ससुराल खारसी गांव पहुंचीं. बारातियों का वाद्य यंत्रों की थाप के साथ फूल मालाएं पहनाकर स्वागत किया गया.

 

जौनसार बावर में विवाह की अनोखी परंपरा है जोजोड़ा
विवाह में आमतौर पर दूल्हा बारात लेकर दुल्हन के घर जाता है और विवाह की रस्में पूरी करके दुल्हन को विदा कराकर लाता है. जौनसार बावर में दुल्हनें बारात लेकर दूल्हे के घर जाती हैं. विवाह की रस्में पूरी होने के बाद अगले दिन उसके साथ गए 15-20 बाराती वापस लौट जाते हैं. दो दिन बात दुल्हन अपने दूल्हे के साथ मायके जाती है. विवाह की इस परंपरा को जौनसार बावर में जोजोड़ा कहते हैं.

जोजोड़ा विवाह में फेरे नहीं होते हैं
आमतौर पर हिंदुओं के विवाह में सात फेरे होते हैं. जोजोड़ा विवाह की खास बात यह है कि इसमें फेरे नहीं होते हैं. पंडित कुल पुरोहित द्वारा मंत्रोच्चार पूजा के समय में दूल्हा दूल्हन को वचन पूरे किए जाते हैं. वरमाला के बाद दूल्हे की बहन द्वारा दूल्हा दुल्हन के पैरों को धोने की रस्म भी की जाती है. उसके बाद घर के मुख्य द्वार पर दूल्हे की मां के द्वारा वर वधू को तिलक, धूप देकर आशीर्वाद दिया जाता.

दूल्हों के बड़े भाई खजान सिंह चौहान जो शिक्षक के रूप मे सेवा दे रहे हैं, उन्होंने कहा कि- सबसे पहले हम सबको बधाई देना चाहते हैं. हमारे पूर्वजों ने इस प्रथा को बनाया है. हमारे कुल देवता के आशीर्वाद से हम अपनी परंपरा को बरकरार रखते हुए आगे बढ़ रहे हैं. हमने कोशिश की कि जितने ज्यादा भाइयों का रिश्ता एक साथ हो सकता है किया जाए. आज की महंगाई के जमाने में शादियों में जितना कम खर्च हो सके हमने कोशिश की. हम अपनी कोशिश में सफल हुए.
-खजान सिंह चौहान, दूल्हों के बड़े भाई

दिखावे में पैसे खर्च करने की जगह बच्चों की पढ़ाई में खर्चने की सलाह
खजान सिंह चौहान ने कहा कि हम सभी क्षेत्रवासियों से अपील करते हैं कि शादी विवाह और अन्य दिखावे में खर्च पर लगाम लगाने के साथ बच्चों की पढ़ाई-लिखाई में पैसे खर्च करें. हमने शादी-विवाह में शराब और अन्य नशे पर प्रतिबंध लगाया है. हमने महंगे कपड़ों और गहनों पर खर्च करने से भी परहेज किया है. न तो दूल्हा पक्ष पर आर्थिक बोझ डाला और न ही दुल्हन पक्ष पर खर्च का दबाव डाला.

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