
देहरादून, 12 जून। भारत के दिग्गज शूटर और कोच जसपाल राणा का 12 जून शुक्रवार को दिल्ली में निधन हो गया. महान निशानेबाज पद्मश्री और एशियाई खेलों के स्वर्णिम सितारे जसपाल राणा का पार्थिव शरीर शुक्रवार देर शाम करीब पौने आठ बजे देहरादून स्थित उनके आवास पहुंचा। जैसे ही एंबुलेंस उनके घर पहुंची, पूरा माहौल गम और शोक में डूब गया। पौंधा क्षेत्र के मझोन गांव में हर तरफ रुदन, सिसकियों और चीखों की आवाजें सुनाई देने लगीं। घर के बाहर सैकड़ों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी थी।

जसपाल राणा के पिता नारायण सिंह राणा बेटे को अंतिम बार देखकर खुद को संभाल नहीं पाए। उनकी आंखों से आंसुओं की धारा बहती रही और वह सिसकते हुए अपने पैरों पर भी ठीक से खड़े नहीं हो पा रहे थे। जिस गांव ने अपने बेटे को विश्व पटल पर भारत का गौरव बनते देखा था, आज उसी गांव की आंखें नम थीं।
‘मेरा पिता समान गुरु चला गया’ कहकर रो पड़ीं मनु भाकर

रात करीब आठ बजे जसपाल राणा की शिष्या और ओलिंपिक पदक विजेता मनु भाकर भी मझोन गांव पहुंचीं। अपने गुरु के पार्थिव शरीर के सामने पहुंचते ही वह खुद को रोक नहीं सकीं और फूट-फूटकर रोने लगीं। गमगीन मनु भाकर की आंखों से लगातार आंसू बह रहे थे। इस दौरान उन्होंने मीडिया से कोई बातचीत नहीं की। भावुक होकर उन्होंने केवल इतना कहा कि ‘मेरा पिता समान गुरु चला गया।’ मनु ने कहा कि वह जो कुछ भी हैं जसपाल सर की बदौलत हैं। उन्होंने अनुशासन और जुनून का संतुलन बनाकर आगे बढ़ने की सीख दी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जसपाल राणा को श्रद्धांजलि अर्पित की. इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण समेत कई जनप्रतिनिधि और गणमान्य लोग मौजूद रहे. सभी ने राणा के निधन को खेल जगत की अपूरणीय क्षति बताया. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि जसपाल राणा का जाना उत्तराखंड के साथ-साथ पूरे देश के लिए अपूरणीय क्षति हैं. जसपाल राणा खेल के सितारे थे, जिन्होंने खेल जगत में भारत का नाम रोशन किया. साथ ही कई खिलाड़ियों को देश के लिए खेलने के लिए तैयार किया. भारत का पदक दिलाने के लिए उनका खेल और कोचिंग दोनों काम आए. ये हम सबके के लिए ऐसे क्षति है, जिसकी भरपाई नहीं हो सकती है.
बता दें कि जसपाल राणा भारतीय निशानेबाजी के सबसे बड़े नामों में शुमार थे. उन्होंने अपने शानदार करियर में कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स सहित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में कुल 23 पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया. खिलाड़ी के साथ-साथ कोच के रूप में भी उन्होंने कई प्रतिभाओं को तराशा. मनु भाकर समेत अनेक निशानेबाजों की सफलता के पीछे उनके मार्गदर्शन को अहम माना जाता है.
दरअसल, जसपाल राणा विश्व कप प्रतियोगिता के सिलसिले में जर्मनी गए थे. वहां से लौटने के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें दिल्ली के मैक्स साकेत अस्पताल में भर्ती कराया गया. पिछले कई दिनों से उनका उपचार चल रहा था, लेकिन शुक्रवार सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली. शुक्रवार शाम उनका पार्थिव शरीर देहरादून के पोंधा स्थित मझौन गांव स्थित आवास लाया गया, जहां अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ी.
शनिवार सुबह 10 बजे तक अंतिम दर्शन
जसपाल राणा का पार्थिव शरीर शनिवार सुबह 10 बजे तक देहरादून स्थित उनके आवास पर अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। इसके बाद पार्थिव शरीर को वाराणसी ले जाया जाएगा, जहां उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। परिवार से जुड़े सूत्रों के अनुसार, भगवान शिव और मां गंगा के प्रति उनकी गहरी आस्था थी। उन्होंने जीवनकाल में इच्छा जताई थी कि अंतिम संस्कार वाराणसी में हो। अब उसी इच्छा के अनुरूप उन्हें अंतिम विदाई दी जाएगी।



