
गोपेश्वर (चमोली), 27 जुलाई, 26. उत्तराखंड की लोक-संस्कृति और अटूट आस्था का प्रतीक मां नंदा देवी बड़ी जात (लोकजात/यात्रा) 5 से 30 सितम्बर तक आयोजित की जा रही है। पांच से 30 सितंबर तक आयोजित होने वाली मां नंदा देवी बड़ी जात की तैयारियों के तहत यात्रा समिति के पदाधिकारियों ने सोमवार को बदरीनाथ धाम पहुंचकर भगवान बदरी विशाल के दर्शन किए और यात्रा के सफल आयोजन की कामना की।
बदरीनाथ मंदिर के रावल अमरनाथ नंबूदरी को भेजा न्योता

समिति के अध्यक्ष कर्नल (रिटा.) हरेंद्र सिंह रावत और उपाध्यक्ष सुखबीर रौतेला ने बदरीनाथ मंदिर के रावल अमरनाथ नंबूदरी, बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के पदाधिकारियों तथा सीमांत गांव बामणी और माणा के प्रतिनिधियों से भेंट कर उन्हें बड़ी जात में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण दिया। इस दौरान सभी से यात्रा के सफल, शांतिपूर्ण और भव्य आयोजन के लिए सहयोग का आग्रह किया गया। समिति पदाधिकारियों ने कहा कि नंदा देवी बड़ी जात राज्य की आस्था, संस्कृति और लोक परंपराओं का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन है।
लोक परंपरा और बेटी की विदाई का प्रतीक
यह यात्रा मां नंदा (पार्वती) के अपने मायके (हिमालय के मैदानी/निचले गांव) से अपने ससुराल कैलाश पर्वत लौटने की पौराणिक कथा और रीति-रिवाज पर आधारित है। इसे गढ़वाल और कुमाऊं दोनों क्षेत्रों को एक सूत्र में बांधने वाले सबसे बड़ा सांस्कृतिक पर्व माना जाता है। भक्तजन मां नंद की डोली (छतौली) के साथ कठिन पैदल रास्तों से गुजरते हैं। इस यात्रा में प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश-विदेश से भी हजारों श्रद्धालु और यात्री शामिल होते हैं।
यात्रा का मार्ग और मुख्य पड़ाव
यात्रा चमोली जिले के सिद्धपीठ कुरुड़/नौटी से शुरू होकर उच्च हिमालयी पड़ावों जैसे बेदनी बुग्याल, पातर-नचौणिया, रूपकुंड होते हुए हेमकुंड पहुंचती है। लगभग 280 किलोमीटर की यह पैदल मार्ग यात्रा अति दुर्गम और मनमोहक हिमालयी बुग्यालों और बर्फीली चोटियों के बीच से गुजरती है।


