बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आयुर्वेद को बढ़ावा दे रही उत्तराखंड सरकार, आर्युवेद अस्पतालों ECG सेवा शुरू

देहरादून, 27 जुलाई, 26. भारत सरकार के साथ ही उत्तराखंड सरकार भी प्रदेश में आयुर्वेद को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है, ताकि जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सके. आयुर्वेद की पुरानी पद्धति के साथ आयुष विभाग अब हाईटेक भी हो रहा है, जिसके तहत प्रदेश के सभी 95 ब्लॉक में मौजूद आयुर्वेदिक अस्पतालों में ईसीजी की सेवा भी शुरू हो गई है. इसके साथ ही अब आयुष विभाग, प्रदेश के सभी जिलों में सुप्रज्ञा केंद्र खोलने का निर्णय लिया है, ताकि सामान्य प्रसव के लिए गर्भवती महिलाओं को आयुर्वेद और पंचकर्म की सुविधा उपलब्ध कराई जा सके.
आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को हाईटेक कर रही सरकार
आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति, प्राचीन समय से ही चली आ रही है. यही वजह है कि सरकार इस चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा दे रही है, ताकि जनता बिना किसी साइड इफेक्ट के स्वस्थ हो सके. आयुर्वेद को हाईटेक करने की दिशा में विभाग ने कदम भी बढ़ा दिया है, जिसके तहत आयुर्वेद अस्पतालों में एआई आधारित ईसीजी मशीनें लगाई गई हैं. ऐसे में आयुर्वेद अस्पताल में आने वाले हार्ट मरीजों की ईसीजी की जाएगी. साथ ही एआई के जरिए तत्काल रिपोर्ट भी तैयार कर, उनका इलाज किया जाएगा. आयुष विभाग का हाईटेक होने को लेकर ये पहला प्रयोग किया गया है.
प्रदेश के सभी 13 जिलों में सुप्रज्ञा केंद्र खोलने का निर्णय
वर्तमान समय में सामान्य प्रसव के बजाए सिजेरियन डिलीवरी का चलन तेजी से बढ़ता जा रहा है, जिसकी मुख्य वजह वर्तमान समय का खानपान और दैनिक दिनचर्या है. जिसको देखते हुए आयुष विभाग, सामान्य प्रसव को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश के सभी 13 जिलों में सुप्रज्ञा केंद्र खोलने का निर्णय लिया है. इस योजना के लिए भारत सरकार ने 1.30 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति भी दे दी है. ऐसे में इस केंद्र के खुलने के बाद सामान्य और सुरक्षित प्रसव के लिए गर्भवती महिलाओं को जिला स्तर पर प्रसव से पहले खानपान की सही जानकारी और दिनचर्या के साथ ही पंचकर्म की सुविधा दी जाएगी.
आयुष मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि मरीजों को आयुर्वेद अस्पतालों में बेहतर सुविधाएं मिले इसके लिए काम कर रहे है, जिसका नतीजा है कि ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है. ऐसे में गर्भवती महिलाओं के लिए अलग से व्यवस्था बनाई गई है. ऐसे में आयुर्वेद के क्षेत्र में काफी बदलाव लेकर आ रहे है. साथ ही कहा कि आयुर्वेद में अलग अलग क्षेत्रों में लगातार रिसर्च होती है, लेकिन राज्य स्तर पर एक रिसर्च अनुसंधान केंद्र बने इसकी मांग भारत सरकार से की गई है. ऐसे में उन्हें उम्मीद है कि उत्तराखंड को रिसर्च अनुसंधान केंद्र मिल जाएगा.


