
स्पोर्ट्स डेस्क, 4 जुलाई, 26. बिहार के समस्तीपुर जिले का छोटा सा कस्बा ताजपुर, जहां आज भी जिंदगी की रफ्तार चाय की दुकानों और खेत-खलिहानों के बीच चलती है, अब भारतीय क्रिकेट के नक्शे पर स्थायी पहचान बना चुका है। कभी शांत और साधारण रहा यह इलाका अब एक नई वजह से पूरे देश में जाना जाता है, 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी का घर। 15 साल की उम्र में इंग्लैंड के खिलाफ टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू करने वाले वैभव सूर्यवंशी आज बिहार के समस्तीपुर जिले के छोटे से कस्बे ताजपुर की नई पहचान बन चुके हैं।
सचिन तेंदुलकर का 36 साल पुराना रिकार्ड टूटा
सचिन ने 15 नवम्बर 1989 को पाकिस्तान के खिलाफ 16 साल और 205 दिन की उम्र में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय मैच खेला था। वैभव ने मात्र 15 साल और 99 दिन की उम्र में टीम इंडिया का टोपी हासिल कर इस रिकार्ड को अपने नाम कर दिया। वे भारत के लिए टी-20 खेलने वाले 122वें खिलाड़ी बने। महिला क्रिकेट में शेफाली वर्मा ने 15 साल 239 दिन में डेब्यू किया था, वैभव उनसे भी आगे निकल गये। सचिन ने जब 1989 में अपना पहला अंतर्राष्ट्रय मैच खेला था तो उन्होंने अपनी पहली पारी में 15 रन बनाये थे। वैभव ने भी अपने एेतिहासिक डेब्यू में 14 रन का स्कोर किया।
IPL में अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से सुर्खियां बटोरी वैभव ने
आईपीएल में अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से सुर्खियां बटोरने वाले वैभव ने अब एक और बड़ा मुकाम हासिल कर लिया है। इंग्लैंड के खिलाफ मैनचेस्टर में खेले गए दूसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में टीम इंडिया के लिए डेब्यू करते ही उन्होंने भारतीय क्रिकेट इतिहास में सबसे कम उम्र में टी20 अंतरराष्ट्रीय खेलने वाले खिलाड़ी का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। महज 15 साल 99 दिन की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखकर वैभव ने यह साबित कर दिया कि उनकी कहानी अभी सिर्फ शुरू हुई है।
आईपीएल से इंटरनेशनल तक का सफर
वैभव सूर्यवंशी ने आईपीएल में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से सभी का ध्यान खींचा था। दुनिया के सर्वश्रेष्ठ तेज गेंदबाजों में शामिल जसप्रीत बुमराह के एक ओवर में लगातार दो छक्के लगाने के बाद क्रिकेट जगत को एहसास हो गया था कि यह खिलाड़ी बड़े मंच के लिए तैयार है। आईपीएल में उनके लिए जो उत्साह और दीवानगी देखने को मिली, वह किसी युवा खिलाड़ी के लिए बेहद दुर्लभ थी। अब वही प्रदर्शन उन्हें भारतीय टीम तक ले आया। इंग्लैंड जैसी मजबूत टीम के खिलाफ टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू करना उनके करियर का सबसे बड़ा पड़ाव माना जा रहा है।
पिता का अधूरा सपना, बेटे ने किया पूरा
वैभव सूर्यवंशी की कहानी उनके पिता संजीव सूर्यवंशी के बिना अधूरी है। संजीव खुद क्रिकेटर बनना चाहते थे, लेकिन उस समय बिहार को बीसीसीआई से मान्यता नहीं मिलने के कारण उनका सपना अधूरा रह गया। रोजगार की तलाश में उन्होंने मुंबई का रुख किया। वहां शिपिंग यार्ड में काम किया, पोर्ट पर मजदूरी की और जरूरत पड़ने पर नाइट क्लब में बाउंसर तक बने। अभिनय का भी शौक था, लेकिन परिवार की जिम्मेदारियों ने उन्हें अलग राह चुनने पर मजबूर कर दिया।
चार साल की उम्र में हाथ में थमाया बल्ला
वैभव को उनके चौथे जन्मदिन पर पहला क्रिकेट बैट मिला। तभी से उनके खेल में कुछ अलग दिखाई देने लगा। 2018 के आसपास उनकी प्रतिभा खुलकर सामने आई तो संजीव ने एक बार फिर संघर्ष शुरू किया, लेकिन इस बार अपने बेटे के भविष्य के लिए।
समस्तीपुर के मैदान से शुरू हुआ सफर
वैभव ने अपने शुरुआती क्रिकेट के दिन समस्तीपुर के एक बड़े मैदान में बिताए। उनके पहले कोच ब्रजेश झा बताते हैं कि नौ साल की उम्र में भी उनका खेल 14-15 साल के खिलाड़ी जैसा परिपक्व नजर आता था। कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान भी विशेष अनुमति लेकर उनकी ट्रेनिंग जारी रखी गई, ताकि उनका अभ्यास प्रभावित न हो।
15 साल की उम्र में इंटरनेशनल डेब्यू, करोड़ों उम्मीदों का चेहरा
आईपीएल में मिली पहचान के बाद वैभव पर करोड़ों रुपये की बोली और बड़ी उम्मीदों की चर्चा हुई थी। लेकिन टीम इंडिया में डेब्यू के साथ उन्होंने यह साबित कर दिया कि उन पर जताया गया भरोसा बेवजह नहीं था। महज 15 साल 99 दिन की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने वाले वैभव अब सिर्फ बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे भारतीय क्रिकेट के भविष्य के सबसे बड़े सितारों में गिने जा रहे हैं।



