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पर्यटकों के लिए आज से खुलेंगे ‘फूलों की घाटी’ के ‘द्वार’, घाटी में हर 15 दिन में बदल जाता है रंग

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चमोली, 31 मई। उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित यूनेस्को (UNESCO) की विश्व प्राकृतिक धरोहर ‘फूलों की घाटी’ के द्वार पर्यटकों के लिए आज से खोल दिये जायेंगे। ग्रीष्मकाल और मानसून के इस सीजन में देश-विदेश के प्रकृति प्रेमी अब इस जन्नत जैसी खूबसूरत घाटी के दर्शन कर सकते हैं। इसके लिए पार्क प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं. घाटी में विभिन्न प्रजातियों के अल्पाइन पुष्प भी खिलने लगे हैं.

भ्यूंडार घाटी में स्थित फूलों की घाटी में इस बार सीजन की शुरुआत से पहले ही रंग-बिरंगे फूलों ने अपनी छटा बिखेरनी शुरू कर दी है. अनुकूल मौसम के चलते घाटी का प्राकृतिक सौंदर्य निखर उठा है. जिससे शुरुआती दौर में पहुंचने वाले पर्यटकों को भी हिमालयी पुष्पों की अद्भुत सुंदरता देखने को मिलेगी.

हर 15 दिन में घाटी का रंग बदल जाता है
समुद्रतल से लगभग 12,995 फीट की ऊंचाई पर 87.5 वर्ग किमी में फैली यह घाटी अपनी अनूठी जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है। इस घाटी की सबसे बड़ी विशेषता यहां 500 से अधिक प्रजातियों के फूल पाये जाते हैं और हर 15 दिन में घाटी का रंग बदलता हुआ नजर आता है। इस बार पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र ‘लेगी नाले’ में मौजूद हिमखंड (ग्लेशियर) भी रहेगा।

आज सुबह पूजा-अर्चना के साथ होगा शुभारंभ
सोमवार सुबह मुख्य प्रवेश द्वार पर पूजा-अर्चना के साथ पर्यटन सत्र का शुभारंभ किया जाएगा. इसके बाद पार्क प्रशासन, ईको डेवलपमेंट कमेटी भ्यूंडार, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और पर्यटकों की मौजूदगी में पहले दल को घाटी के लिए रवाना किया जाएगा.वन विभाग की ओर से घाटी की जैव विविधता और वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर विशेष निगरानी व्यवस्था की गई है. कर्मचारियों द्वारा लगातार गश्त की जा रही है. पर्यावरण संरक्षण के नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा.

हर वर्ष हजारों पर्यटक यहां पहुंचकर हिमालय की दुर्लभ वनस्पतियों और प्राकृतिक वैभव का अनुभव करते हैं. घाटी खुलने से गोविंदघाट, पुलना, भ्यूंडार और घांघरिया क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियां भी तेज होंगी. जिससे होटल व्यवसायियों, होमस्टे संचालकों, पोर्टरों और स्थानीय व्यापारियों को लाभ मिलने की उम्मीद है.

सुबह 7 बजे प्रवेश और शाम को 5 बजे वापसी
पर्यटकों को सुबह 7 बजे घाटी में प्रवेश की अनुमति मिलती है और दोपहर 2 बजे के बाद प्रवेश बंद हो जाता है। सभी पर्यटकों को शाम 5 बजे तक हर हाल में बेस कैंप (घांघरिया) वापस लौटना होता है। घाटी में रात को रुकने की सख्त मनाही है। पर्यटक घाटी के अंदर केवल 5 किलोमीटर दायरे में घूम सकते हैं। घांघरिया के आगे घाटी में कोई दुकान नहीं है। इसलिए पर्यटकों को सलाह दी जाती है कि अपने साथ पानी और खानी की सामग्री खुद लेकर जायें।

प्रवेश शुल्क
पार्क प्रशासन की तरफ से भारतीय पर्यटकों के लिए प्रवेश शुल्क 200 रुपये प्रति व्यक्ति तथा 60 साल से अधिक आयु वालों को 100 रुपये और विदेशी पर्यटकों के प्रवेश शुल्क 800 रुपये प्रति व्यक्ति रखा गया है।

कैसे पहुंचेंगे फूलों की घाटी
चमोली जिले में स्थित वैली ऑफ फ्लावर का हर साल दीदार करने के लिए बड़ी तादाद में सैलानी पहुंचते हैं. यहां खिले रंग बिरंगे फूल सैलानियों को बरबस ही लोगों को आकर्षित करते हैं. फूलों की घाटी आने के लिए आपको चमोली जिले में प्रवेश करना होगा. चमोली जिले तक जाने के लिए आपको ऋषिकेश तक ट्रेन या हवाई जहाज से देहरादून आना होगा. सैलानी जिसके बाद सड़क मार्ग से चमोली जिले तक पहुंच सकते हैं. चमोली से सैलानी 19 किमी का सफर कर गोविंदघाट से फूलों की घाटी तक पहुंच सकते हैं.

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