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जय बदरी विशाल के उद्घोष के साथ शंकराचार्य की गद्दी, गाडू घड़ा और गरुड़ की डोली बदरीनाथ धाम रवाना, video

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चमोली, 21 अप्रैल। उत्तराखंड के चारधाम में से दो धाम यमुनोत्री और गंगोत्री के कपाट खुल चुके हैं. अब केदारनाथ और बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने बाकी हैं. इसी कड़ी में बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की प्रक्रिया के तहत आज भगवान बदरी विशाल की शीतकालीन पूजा स्थल नृसिंह मंदिर ज्योतिर्मठ (जोशीमठ) में विशेष पूजा अर्चना की गई.

इसके तहत भगवान नृसिंह, गरुड़, लक्ष्मी, गणेश, शंकराचार्य की प्राचीन और पवित्र गद्दी की पूजा संपन्न हुई. मंदिर प्रांगण में विधिवत पंच पूजा के बाद आदि गुरु शंकराचार्य की प्राचीन गद्दी और विष्णु वाहन भगवान गरुड़ की डोली, पवित्र गाडू घड़ा भू बैकुंठ बदरीनाथ धाम के लिए रवाना हुई. यानी 21 अप्रैल को नृसिंह मंदिर ज्योतिर्मठ से पूजा-अर्चना बाद आदि गुरु शंकराचार्य की पवित्र डोली एवं गरुड़ जी की उत्सव मूर्ति विधिवत वैदिक मंत्रोच्चार के साथ रावल अमरनाथ नंबूदरी समेत बदरी-केदार मंदिर समिति उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती की मौजूदगी में बदरीनाथ धाम के लिए प्रस्थान हुई.

योग बदरी पांडुकेश्वर में विश्राम करेगी देव डोलियां
यह देव डोलियां पहले पड़ाव योग बदरी पांडुकेश्वर पहुंचेगी. जहां से बदरीनाथ धाम के लिए रवाना होंगी. इससे पहले बीते शनिवार को ज्योर्तिमठ में तिमुंडिया वीर पूजन और गरूड़ छाड़ मेले में आगामी बदरीनाथ यात्रा के सफल शुभारंभ के लिए आशीष मांगा गया था.

22 अप्रैल को योग बदरी पांडुकेश्वर से उद्धव जी और कुबेर जी, आदि गुरु शंकराचार्य जी की गद्दी के साथ बदरीनाथ धाम पहुंचेंगे. जबकि, गरूड़ जी आज 21 अप्रैल को ज्योर्तिमठ से बदरीनाथ धाम पहुंचेंगे.डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत के पदाधिकारी तेल कलश (गाडू घड़ा) के साथ ज्योतिर्मठ पहुंचे. तेल कलश 22 अप्रैल को बदरीनाथ धाम पहुंचेगा. 23 अप्रैल की सुबह 6 बजकर 15 मिनट पर बदरीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनों के खोल दिए जाएंगे.– हरीश गौड़, मीडिया प्रभारी, बीकेटीसी

नृसिंह मंदिर परिसर में स्थित मंदिर के सामने विशेष पूजा-अर्चना के बाद आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी और गाडू घड़ा तेल कलश बदरीनाथ धाम के लिए रवाना हुआ। इस दौरान भगवान बदरी विशाल के भजनों के साथ महिलाओं व सेना के बैंडो की मधुर ध्वनि ने नृसिंह मंदिर क्षेत्र भक्तिमय कर दिया।

बता दें कि रात्रि विश्राम पांडुकेश्वर स्थित योग ध्यान बदरी में करने के बाद अगले दिन भगवान कुबेर व उद्धव की डोली, आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी व गाडू घड़ा तेल कलश यात्रा ने बदरीनाथ के लिए प्रस्थान किया। इस दौरान बदरीनाथ धाम के रावल भी साथ साथ चले। अब 23 अप्रैल को विधि विधान के साथ बदरीनाथ के कपाट खोल लिए जाएंगे।

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