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कोटद्वार की बंद फैक्ट्री में चल रहा था मौत का कारोबार, ‘ऑपरेशन फेक पिल’ ने खोली माफियाओं की परतें

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कोटद्वार, 23 मई। अगर आप भी ऑनलाइन दवा खरीद रहे हैं, तो सावधान हो जाएं. हो सकता है वो दवा नकली हो और आपको नुकसान पहुंचा सकती है. देवभूमि उत्तराखंड में लोगों के साथ खिलवाड़ करने वाले नकली दवा माफियाओं पर लगातार एसटीएफ अपना शिकंजा कस कस रही है.

ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर नकली दवा बेचकर करते थे धंधा
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर नकली जीवनरक्षक दवाइयों का धंधा करने वाले गिरोह का खुलासा होने के बाद अब जांच एजेंसियां एक-एक कड़ी जोड़ते हुए पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने में जुट गई है. 24 घंटे के भीतर हुई दूसरी बड़ी कार्रवाई में कोटद्वार स्थित एक अवैध दवा फैक्ट्री को सील कर दिया गया. इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि नकली दवाओं का यह कारोबार बेहद संगठित तकनीकी रूप से चालाक और कई राज्यों में फैला हुआ था.

सिगड्डी स्थित मैसर्स नैक्टर हर्ब्स एंड ड्रग्स का लाइसेंस 2024 में हो चुका था निरस्त
एसटीएफ को इनपुट मिला था कि कोटद्वार के सिडकुल सिगड्डी क्षेत्र में स्थित एक बंद पड़ी फैक्ट्री के भीतर गुपचुप तरीके से दवाओं का निर्माण किया जा रहा है. सूचना के सत्यापन के बाद एसटीएफ, ड्रग विभाग और प्रशासन की संयुक्त टीम ने मैसर्स नैक्टर हर्ब्स एंड ड्रग्स परिसर में छापेमारी की. जांच में सामने आया कि फैक्ट्री का लाइसेंस वर्ष 2024 में ही निरस्त किया जा चुका था. बावजूद इसके परिसर के भीतर मशीन, टैबलेट निर्माण उपकरण और संदिग्ध सामग्री मौजूद थी. अधिकारियों ने मौके से लगदोभग तीन किलो कंप्रेस्ड टैबलेट और 34 पंच उपकरण बरामद किए, जिनका इस्तेमाल दवा निर्माण में किया जाता है.

2024 में तेलंगाना पुलिस ने इसी फैक्ट्री पर माा था छापा


जिस फैक्ट्री पर एसटीएफ ने कार्रवाई की, उसका नाम पहले भी गंभीर आरोपों में सामने आ चुका है. कोरोना महामारी के दौरान वर्ष 2021 में इसी यूनिट पर नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन बनाने के आरोप लगे थे. उस दौर में जब लोग अपनों की जान बचाने के लिए अस्पतालों के बाहर संघर्ष कर रहे थे, तब कुछ लोग बीमारी को कारोबार में बदल रहे थे. यही नहीं, वर्ष 2024 में तेलंगाना पुलिस ने भी इसी फैक्ट्री पर छापा मारकर नकली दवाइयों और फर्जी पैकेजिंग सामग्री का बड़ा जखीरा बरामद किया था. इसके बावजूद, अवैध गतिविधियां पूरी तरह बंद नहीं हुईं और नेटवर्क लगातार सक्रिय बना रहा.

फेसबुक पेज से चल रहा था नकली दवाओं का ऑनलाइन बाजार
पूरे मामले की शुरुआत एसके हेल्थ केयर नाम के एक फेसबुक पेज से हुई. जहां नामी कंपनियों की दवाइयां बाजार मूल्य से आधे दाम में बेची जा रही थीं. एसटीएफ को जब इस ऑनलाइन नेटवर्क पर शक हुआ तो टीम ने खुद ग्राहक बनकर दवाइयां मंगाईं. जांच में सामने आया कि जो दवाइयां लोगों तक पहुंचाई जा रही थीं, वे असली नहीं बल्कि बेहद शातिर तरीके से तैयार की गई नकली दवाइयां थीं. पैकेजिंग इतनी सटीक बनाई गई थी कि सामान्य ग्राहक ही नहीं कई मेडिकल कारोबारी भी धोखा खा रहे थे.

गिरफ्तार आरोपियों ने उगले कई सनसनीखेज राज
एसटीएफ की गिरफ्त में आए आरोपियों में गौरव त्यागी और जतिन सैनी शामिल है. पूछताछ में गौरव त्यागी ने खुलासा किया कि रुड़की में उसकी फैक्ट्री पहले भी पकड़ी जा चुकी थी. लेकिन इसके बावजूद उसने अलग-अलग स्थानों से फिर नकली दवा निर्माण शुरू कर दिया. उसने कबूल किया कि जरूरत पड़ने पर बंद पड़ी फैक्ट्रियों को अस्थायी रूप से खोला जाता था और उत्पादन के बाद फिर उन्हें बंद कर दिया जाता था, ताकि किसी को शक न हो. जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य चेहरों की तलाश में जुटी है.

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